On the one hand, the workers are battling the risks of the Coronavirus and death, and on the other hand, the atrociously anti-worker Modi Government has imposed an utterly unplanned and ill-conceived lockdown, which, too, has taken hundreds of lives. No arrangements were made for those migrant workers who wanted to return to their homes. Consequently, the haphazard Shramik Special trains have caused deaths of at least 80 workers and their children. Now again, equally arbitrarily, in the name of lifting the lockdown, we are being pushed back to work in factories and workshops, so that the capitalists’ machinery of profit, which was at a standstill for months, can be set into motion again. As a result, workers in dozens of factories and offices have contracted the virus, the infection is spreading rapidly in working-class neighbourhoods and causing their deaths, however, many of these numbers are being hidden and suppressed on a massive scale. The capitalists and their agents have given us the alternative – either die of hunger and unemployment or die of Covid-19! This is no choice at all and we have the right to be protected from death by the virus as well as death from hunger and unemployment.
कामगार संघर्ष संकल्प अभियान – कोरोनाने मरण नामंजूर! बेरोजगारी-भुकेने मरण नामंजूर!
एकीकडे कामगार कोरोना आणि मृत्यूचा धोका पत्करत आहेत. दुसरीकडे घोर कामगार-विरोधी मोदी सरकारने कुठलीही पूर्वतयारी न करता जे लॉकडाऊन देशावर लादले त्यात शेकडो लोकांचे जीव गेले. कोट्यवधी कामगारांचे पगार मालकांनी लॉकडाऊन काळात दिलेच नाहीत! स्वच्छता, बससेवा, रेल्वे सारख्या कर्मचाऱ्यांना आरोग्याच्या सुविधा, पीपीई कीट सुद्धा दिल्या गेल्या नाहीत! लोकप्रतिनिधींनी तर जनतेला वाऱ्यावरच सोडून दिले! महामारीच्या काळातही वस्त्या-झोपडपट्य़ांमधल्या स्वच्छतेच्या सुविधा सुधारल्या गेल्या नाहीत! जे प्रवासी कामगार घरी परत जाऊ इच्छित होते त्यांच्यासाठी कोणतीच व्यवस्था केली गेली नाही. परिणामी श्रमिक ट्रेनमध्ये कमीत कमी ८० कामगारांचा आणि त्यांच्या मुलाबाळांचा मृत्यू झाला आणि आता पुन्हा एकदा कुठलीही पूर्वतयारी न करताच लॉकडाऊन उघडण्याच्या नावावर आपल्याला कारखान्यांच्या कामांमध्ये जुंपले जात आहे, जेणेकरून दोन महिने ठप्प पडलेली भांडवलदारांची नफ्याची यंत्रणा पुन्हा सुरु होईल. ह्यामुळे देशभरातल्या अनेक कारखान्यांमध्ये कामगार बांधवांना कोरोनाची लागण झालेली आहे, कामगार वस्त्यांतही कोरोनाची साथ वेगाने पसरत आहे, आणि तिथेही कामगारांचे मृत्यू होत आहेत, परंतु खूप मोठ्या प्रमाणावर हि आकडेवारी लपवली जात आहे.
শ্রমিকদের সংগ্রামে নামার শপথ অভিযান – মানিনা আমরা করোণায মরে যাওয়া ! মানিনা বেকার-নিরন্ন মরে যাওয়া !!
যখন শ্রমিকেরা প্রতি মূহুর্তে করোণা আক্রান্ত হয়ে মৃত্যুর মুখোমুখি দাঁড়াতে বাধ্য হচ্ছে সেই ভয়াল সময়ে কোনোও প্রস্তুতি, কোনোও পরিকল্পনা, কোনোও ভাবনা চিন্তা ছাড়াই, নগ্নভাবে শ্রমিক বিরোধী মোদি সরকার সারাদেশে লকডাউন চাপিয়ে দিল আর শত শত তাজা প্রাণ সম্পূর্ণ অকারনেই শেষ হয়ে গেল। প্রবাসী শ্রমিকেরা যখন সম্পূর্ণ নিরুপায় হয়ে বাড়ি ফিরবে তারা দেখলো তাদের জন্য কোন ব্যবস্থা নেই, রয়েছে সমস্ত রকম বঞ্চনা, অত্যাচার আর অপমান। চূড়ান্ত অব্যবস্থার মধ্যে শ্রমিকট্রেনগুলিতে আশী জন শ্রমিক তাদের স্ত্রী ও সন্তানেরা বেঘোরে প্রাণ হারাল। এখন যখন লকডাউন তুলে নিয়ে আমাদের আবার কল-কারখানায় কাজে ফিরে যেতে বাধ্য করা হচ্ছে, তার পিছনে আসল কারণ গত কয়েক মাস ধরে স্তব্ধ হয়ে থাকা মালিকদের মুনাফার মেশিনারিকে চালু করা, ফলে সারাদেশে বহু জায়গায়, কারখানায় আর কর্মস্থলে শ্রমিক সাথীরা করোণায়ে আক্রান্ত হচ্ছেন, শ্রামিক বস্তিগুলিতে করোণা অত্যন্ত দ্রুতগতিতে ছড়িয়ে পড়ছে, লোকে মারা যাচ্ছে আর ব্যাপক স্তরে সেসব পরিসংখ্যান চেপে দেওয়া হচ্ছে। পুঁজিপতি আর তার দালালেরা আজ আমাদের সামনে শুধু দুটো পথ খোলা রেখেছে, দুটোই মরণের পথ, হয় করোণাযে মর, নয় অভাবে অনাহারে মর। বেঁচে থাকার কোনও পথই আজ আমাদের জন্য খোলা নেই কিন্তু বেঁচে থাকার অধিকার আমরা কারো হাতেই তুলে দিইনি। বিদেশে পড়তে যাওয়া বড়লোকদের ছেলেমেয়েদের জন্য, বেনিয়াদের জন্য, মধ্যবিত্ত শ্রেণীর ভক্তকুলের জন্য মোদি সরকার সদাই তৎপর তাদের জন্য বিশেষ বিমান তৈরি, তাদের জন্য আছে শীতাতপ নিয়ন্ত্রিত বাস। শ্রমিকরা রাস্তায় দুর্ঘটনায় অনাহারে মারা যাক তাদের জন্য সরকারের কোনও সময় নেই, নেই কোনো সহানুভূতি!
മസ്ദൂർ സംഘർഷ് സങ്കൽപ്പ് അഭിയാൻ – കോവിഡ് -19 പിടിപെട്ടു മരിക്കാൻ ഞങ്ങൾ തയ്യാറല്ല! പട്ടിണിയും തൊഴിലില്ലായിമയും മൂലം മരിക്കാൻ ഞങ്ങൾ തയ്യാറല്ല!
ഒരു വശത്തു തൊഴിലാളികൾ കൊറോണ വൈറസിനും മരണത്തോടും മല്ലിട്ടുകൊണ്ടിരിക്കുമ്പോൾ , മറു വശത്തു അങ്ങേയറ്റം തൊഴിലാളി വിരുദ്ധരായ മോദി സർക്കാർ അടിച്ചേൽപ്പിച്ച ആസൂത്രണ രഹിതവും തെറ്റായി വിഭാവനം ചെയ്തതുമായ ലോക്ക് ഡൌൺ മൂലം നൂറുകണക്കിന് മനുഷ്യരുടെ ജീവൻ നഷ്ടപ്പെട്ടിരിക്കുകയാണ്. തങ്ങളുടെ വീടുകളിലേക്ക് മടങ്ങാൻ ആഗ്രഹിച്ച കുടിയേറ്റ തൊഴിലാളികൾക്ക് യാതൊരുവിധത്തിലുള്ള സൗകര്യങ്ങളും സർക്കാർ ഒരുക്കിയില്ല. തൽഫലമായി ശ്രമിക് എന്ന പേരിൽ ധൃതിപിടിച്ചു നിരത്തിലിറക്കിയ പ്രത്യേക തീവണ്ടികളാകട്ടെ എൺപതോളം തൊഴിലാളികളുടെയും കുഞ്ഞുങ്ങളുടെയും മരണത്തിനു കാരണമായി. ഇപ്പോഴാകട്ടെ, കുറച്ചുമാസങ്ങളിലായി നിശ്ചലാവസ്ഥയിലായിരുന്ന, ലാഭം മാത്രം ലക്ഷ്യം വെച്ചുകൊണ്ടുള്ള മുതലാളിത്ത ഉത്പാദന സംവിധാനം വീണ്ടും ചലിപ്പിക്കാനായി, മുൻപത്തേതു് പോലെ ആസൂത്രണ രഹിതമായി ലോക്ക് ഡൌൺ പിൻവലിച്ചു, . ഫാക്ടറികളിലേക്കും തൊഴിൽ ശാലകളിലേക്കും തിരികെപോകാൻ നാം നിർബന്ധിതരായിരിക്കുകയാണ്. ഫാക്ടറികളിലേക്കും ഓഫീസുകളിലേക്കും തിരികെ എത്തിയ ഒരുപാട് തൊഴിലാളികൾക്കു വൈറസ് ബാധിക്കുകയും , തൊഴിലാളികൾ താമസിക്കുന്ന അയല്പക്കങ്ങളിൽ വ്യാപകമായി വൈറസ് പടരുകയും ഒരുപാട് പേർ മരണപ്പെടുകയും ചെയ്തു. എന്നാൽ ഇത്തരം കണക്കുകൾ വലിയതോതിൽ മറച്ചുവെക്കുകയും അടിച്ചമർത്തി വെക്കുകയും ചെയ്യുന്ന സ്ഥിതിവിശേഷമാണുള്ളത് . മുതലാളിമാരും അവരുടെ ദല്ലാളന്മാരും നമുക്ക് മുൻപിൽ വെച്ചിരിക്കുന്ന 2 ബദലുകളാണ്, ഒന്നുകിൽ പട്ടിണിയും തൊഴിലില്ലായിമയും മൂലം മരിക്കുക, അല്ലെങ്കിൽ കോവിഡ് -19 മൂലം മരിക്കുക! നമ്മുടെ മുന്നിൽ മറ്റു വഴികൾ ഇല്ലാതായിരിക്കുകയാണ്. കൊറോണ മൂലമുള്ള മരണത്തിൽ നിന്നും , പട്ടിണിയും തൊഴിലില്ലായിമയും മൂലമുള്ള മരണത്തിൽ നിന്നും സംരക്ഷണം നേടിയെടുക്കാൻ നമുക്ക് അവകാശമുണ്ട്.
ਮਜ਼ਦੂਰ ਸੰਘਰਸ਼ ਸੰਕਲਪ ਮੁਹਿੰਮ – ਸਾਨੂੰ ਮਨਜੂਰ ਨਹੀਂ ਕਰੋਨਾ ਤੋਂ ਮੌਤ! ਸਾਨੂੰ ਮਨਜੂਰ ਨਹੀਂ ਬੇਰੁਜ਼ਗਾਰੀ-ਭੁੱਖਮਰੀ ਤੋਂ ਮੌਤ!
ਇੱਕ ਪਾਸੇ ਮਜ਼ਦੂਰ ਕਰੋਨਾ ਲਾਗ ਅਤੇ ਮੌਤ ਦੇ ਖ਼ਤਰੇ ਨੂੰ ਝੱਲ ਰਹੇ ਹਨ। ਦੂਜੇ ਪਾਸੇ ਨਿਰੀ ਮਜ਼ਦੂਰ-ਦੋਖੀ ਮੋਦੀ ਸਰਕਾਰ ਨੇ ਇਸ ਸੰਕਟ ‘ਚ ਬਿਨਾਂ ਕਿਸੇ ਤਿਆਰੀ ਅਤੇ ਵਿਉਂਤ ਦੇ ਜਿਹੜਾ ਲਾਕਡਾਊਨ ਮੜ੍ਹਿਆ ਉਸ ਵਿੱਚ ਵੀ ਸੈਂਕੜੇ ਜਾਨਾਂ ਖੁੱਸ ਗਈਆਂ। ਜਿਹੜੇ ਪ੍ਰਵਾਸੀ ਮਜ਼ਦੂਰ ਆਪਣੇ ਘਰਾਂ ਨੂੰ ਮੁੜਣਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਸੀ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਵਾਸਤੇ ਕੋਈ ਇੰਤਜਾਮ ਨਹੀਂ ਕੀਤਾ ਗਿਆ। ਸਿੱਟੇ ਵਜੋਂ, ਮਜ਼ਦੂਰ ਰੇਲਗੱਡੀਆਂ ‘ਚ ਘੱਟੋ-ਘੱਟ 80 ਮਜ਼ਦੂਰ ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਬੱਚਿਆਂ ਦੀ ਮੌਤ ਹੋਈ। ਹੁਣ ਫੇਰ ਬਿਨਾਂ ਕਿਸੇ ਵਿਉਂਤ ਦੇ ਲਾਕਡਾਊਨ ਨੂੰ ਖੋਲ੍ਹਣ ਦੇ ਨਾਂ ‘ਤੇ ਸਾਨੂੰ ਫੈਕਟਰੀਆਂ ‘ਚ ਕੰਮ ਕਰਨ ਲਈ ਮਜਬੂਰ ਕੀਤਾ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ, ਤਾਂ ਜੋ ਸਰਮਾਏਦਾਰਾਂ ਦੀ ਕਈ ਮਹੀਨਿਆਂ ਤੋਂ ਰੁਕੀ ਹੋਈ ਮੁਨਾਫੇ ਦੀ ਮਸ਼ੀਨਰੀ ਚਾਲੂ ਹੋ ਸਕੇ। ਸਿੱਟੇ ਵਜੋਂ, ਦੇਸ਼ ਦੀਆਂ ਦਰਜਨਾਂ ਫੈਕਟਰੀਆਂ ਅਤੇ ਦਫ਼ਤਰਾਂ ‘ਚ ਮਜ਼ਦੂਰ ਸਾਥੀਆਂ ਨੂੰ ਕਰੋਨਾ ਲਾਗ ਹੋ ਰਹੀ ਹੈ, ਮਜ਼ਦੂਰ ਬਸਤੀਆਂ ‘ਚ ਕਰੋਨਾ ਲਾਗ ਤੇਜੀ ਨਾਲ ਫੈਲ ਰਹੀ ਹੈ ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀਆਂ ਮੌਤਾਂ ਹੋ ਰਹੀਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਇਸ ਸੰਬੰਧੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਨੂੰ ਵੱਡੇ ਪੱਧਰ ‘ਤੇ ਲੁਕਾਇਆ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਸਰਮਾਏਦਾਰਾਂ ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਦਲਾਲਾਂ ਨੇ ਸਾਨੂੰ ਇਨ੍ਹਾਂ ਚੋਂ ਕੋਈ ਇੱਕ ਚੁਣਨ ਨੂੰ ਕਿਹਾ ਹੈ ਕਿ ਜਾਂ ਤਾਂ ਭੁੱਖ ਅਤੇ ਬੇਰੁਜ਼ਗਾਰੀ ਨਾਲ ਮਰੋ, ਜਾਂ ਫੇਰ ਕਰੋਨਾ ਨਾਲ ਮਰੋ! ਇਹ ਦੋਵੇਂ ਰਾਹ ਗਲਤ ਹਨ ਅਤੇ ਸਾਨੂੰ ਭੁੱਖ-ਬੇਰੁਜ਼ਗਾਰੀ ਨਾਲ ਮੌਤ ਅਤੇ ਕਰੋਨਾ ਨਾਲ ਮੌਤ, ਦੋਵਾਂ ਤੋਂ ਹੀ ਸੁਰੱਖਿਆ ਦਾ ਪੂਰਾ ਹੱਕ ਹੈ।
मज़दूर संघर्ष संकल्प अभियान – हमें मंज़ूर नहीं कोरोना से मौत! हमें मंज़ूर नहीं बेरोज़गारी-भुखमरी से मौत!
एक तरफ़ मज़दूर कोरोना संक्रमण और मौत के जोखिम को झेल रहे हैं। दूसरी तरफ़ घोर मज़दूर-विरोधी मोदी सरकार ने इस संकट में बिना किसी तैयारी और योजना के जो लॉकडाउन थोपा उसमें भी सैकड़ों जानें चली गयीं। जो प्रवासी मज़दूर अपने घरों को लौटना चाहते थे, उनके लिए कोई व्यवस्था नहीं की गयी। नतीजतन, श्रमिक ट्रेनों में कम से कम 80 मज़दूरों और उनके बच्चों की मौत हुई। अब फिर बिना किसी योजना के लॉकडाउन को खोलने के नाम पर हमें कारख़ानों में काम के लिए धकेला जा रहा है, ताकि पूँजीपतियों की मुनाफे़ की महीनों से ठप्प पड़ी मशीनरी चालू हो सके। नतीजतन, देश के दर्जनों कारख़ानों और दफ़्तरों में मज़दूर साथियों को कोरोना संक्रमण हो रहा है, मज़दूर बस्तियों में कोरोना संक्रमण तेज़ी से फैल रहा है और उनकी मौतें हो रही हैं और इनके आँकड़ों को बड़े पैमाने पर छिपाया जा रहा है।
Thousands of Workers join Mazdoor Mahapanchayat at Jantar Mantar, Effigies of Modi and Kejriwal burnt.
Thousands of workers participated in a massive rally and demonstration organized in the capital on 6 March under the banner of ‘Delhi Mazdoor Union’. The workers raised their demands in front of Modi led central government and Kejriwal led state government. Effigies of Modi and Kejriwal were burnt by the demonstrators.
6 मार्च को दिल्ली के दिल में उतरी मजदूर वर्ग की एकजुट ताकत की महा रैली!
दिल्ली के हज़ारो मज़दूर 6 मार्च को अपने हक़ और अधिकारों को हासिल करने के लिए सड़कों पर उतरे। मोदी सरकार के ‘अच्छे दिनों’ की पोल आज आम जनता के सामने खुल चुकी है और साथ ही केजरीवाल सरकार द्वारा दिल्ली के मज़दूरों से किये वादों की असलियत भी जग ज़ाहिर है।‘दिल्ली मज़दूर यूनियन’ के बैनर तले 6 मार्च को दिल्ली के हजारों मज़दूरों ने केन्द्र की मोदी सरकार और दिल्ली की केजरीवाल सरकार के समक्ष अपनी माँगों को लेकर नई दिल्ली के जन्तर-मन्तर पर विशाल प्रदर्शन किया फिर यहीं मज़दूरों की महापंचायत आयोजित की गई। इस मज़दूर पंचायत के बाद मोदी और केजरीवाल का पुतला दहन भी किया गया।
6 मार्च – ‘दिल्ली मज़दूर महापंचायत’ में हज़ारों-हज़ार की संख्या में शामिल हो!!
दो सालों में दिल्ली की मज़दूर और ग़रीब आबादी को दो शब्दों ने बहुत बेवकूफ बनाया है-‘अच्छे दिन’ और ‘आम आदमी’! ‘अच्छे दिनों’ और ‘आम आदमी’ का मंत्र जपने वाले देश के प्रधनमंत्री नरेन्द्र मोदी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने इन दो सालों में दिल्ली के मेहनतकशों के साथ ऐसा बर्ताव किया है जैसा सड़क चलते बटमार और उठाईगीरे भी नहीं करते। ये दोनों ही सरकारें आम मेहनतकशों के हक़-अधिकार एक-एक करके छीन रही हैं। साथ ही लोगों को उल्लू बनाने के लिए आपस में झगड़े की नौटंकी भी खूब कर रही हैं। लेकिन, सच तो यह है कि मोदी और केजरीवाल एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।फर्क बस इतना है कि जो काम मोदी पूँजीपतियों और कॉरपोरेट घरानों के लिए डंके की चोट पर करता है वही काम केजरीवाल थोड़ा छुप-छुपाकर करता है। लेकिन, हम मज़दूरों के प्रति इनके रवैये में कोई फर्क नहीं है।
दिल्ली की जनता से किये गये वायदों को पूरा करने में नाकाम केजरीवाल सरकार कुर्सी छोड़कर भागी
केजरीवाल सरकार शुरू से ही सरकार गिर जाने का मौका तलाश रही थी क्योंकि ‘केजरीवाल एण्ड पार्टी’ को पता था कि सरकार बनते ही असलियत उजागर हो जायेगी! इस्तीफ़ा-नौटंकी के बाद अब केजरीवाल ‘कुरबानी और शहादत’ का मीडिया ड्रामा करेंगे और जनता को मूर्ख बनाने का प्रयास करेंगे। हमें समझने की ज़रूरत है कि केजरीवाल की ‘आप’ और कांग्रेस, भाजपा व अन्य चुनावी पार्टियों में कोई अन्तर नहीं है। जब भी पूरी व्यवस्था और उसे चलाने वाली तमाम लुटेरी चुनावी पार्टियाँ बिल्कुल नंगी हो जाती हैं, तो व्यवस्था को किसी ‘श्रीमान सुथरा’ की ज़रूरत होती है। पहले इस ज़रूरत को मोरारजी देसाई सरकार ने पूरा किया था। आज इस ज़रूरत को ‘केजरीवाल एण्ड पार्टी’ पूरा कर रही है। ऐसा न हो तो जनता व्यवस्था की चौहद्दियों को तोड़ने और बग़ावत व इंक़लाब के बारे में सोच सकती है! इसलिए लुटेरी व्यवस्था को कोई ऐसा नौटंकीबाज़ चाहिए होता है जो अपने आपको ‘ईमानदारी का बुत’ बताये, कुछ गर्म बातें व कुछ प्रतीकात्मक हरक़तें करे, सेफ्टीवॉल्व (केजरीवॉल्व?!) के समान जनता के गुस्से को कारपोरेट मीडिया की सीटी बजा-बजाकर निकाल दे व व्यवस्था के प्रेशर कुकर को फटने से बचा ले! कांग्रेस, भाजपा, सपा, बसपा, माकपा, भाकपा, जदयू आदि जैसी खुली लुटेरी पार्टियाँ सामने फन काढ़े नाग के समान हैं, लेकिन ‘आम आदमी पार्टी’ घास में छिपे ज़हरीले साँप के समान है। बेहतर है कि हम डसे जाने से पहले समझ लें और अपना इंक़लाबी विकल्प खड़ा करने का काम शुरू करें!
Thousands of workers stage demonstration at Delhi secretariat for enacting Contract System abolition Act
Kejriwal government’s character has been exposed today. It is totally against workers. The Aam Aadmi Party is now publically turning its face away from the promises it had made in the election manifesto. To escape from the promise of abolishing the contract labour system, Kejriwal government has formed a committee which will carry out investigation on contract labour. Delhi government already has all the information about the contract labourers of Delhi. Nothing is left to be investigated at this point. What Kejriwal government had to do was to enact a contract labour system abolition legislation in Delhi as against a weak central act. But instead it has chosen to take the beaten path of forming committees. It in itself shows that the Kejriwal government’s promise to abolish the contract labour system was a betrayal with the labourers.
ठेका प्रथा उन्मूलन विधेयक पारित कराने के लिए दिल्ली सचिवालय पर हज़ारों मज़दूरों का विशाल प्रदर्शन
आज केजरीवाल सरकार का चरित्र साफ़ हो गया है। यह पूर्ण रूप से मज़दूर विरोधी है। अपने चुनावी घोषणापत्र में आम आदमी पार्टी ने मज़दूरों से जो-जो वायदे किये थे, वह अब उनसे खुलेआम मुकर रही है। ठेका प्रथा ख़ात्मे के काम से बचने के लिए केजरीवाल सरकार ने एक समिति का गठन किया है जो कि ठेका मज़दूरी पर जाँच करेगी। दिल्ली सरकार के पास पहले ही दिल्ली के ठेका मज़दूरों के बारे में पूरी सूचना है। अब जाँच करने के लिए कुछ भी नहीं है। केजरीवाल सरकार को जो करना था वह यह था कि कमज़ोर केन्द्रीय एक्ट के बरक्स दिल्ली राज्य में एक अलग ठेका प्रथा उन्मूलन विधेयक पारित करवाया जाय। लेकिन इसकी बजाय ‘कमेटी-कमेटी’ का खेल खेला जा रहा है। इसी से पता चलता है कि मज़दूरों से ठेका प्रथा के उन्मूलन का केजरीवाल सरकार का वायदा मज़दूरों के साथ एक धोखा था।
केजरीवाल की पार्टी की गुण्डागर्दी का विरोध करें, इनके असली चेहरे को पहचानें, दिल्ली के मज़दूरों की न्यायसंगत माँगों का पुरजोर समर्थन करें!
इस आन्दोलन से आम आदमी पार्टी को इतनी बौखलाहट क्यों है कि आन्दोलन की अभियान टोलियों के साथ जगह-जगह उनके कार्यकर्ता उलझ रहे हैं, गाली-गलौज कर रहे हैं और पर्चे जला रहे हैं। पिछले एक हफ्ते से उत्तर-पश्चिमी दिल्ली क्षेत्र में लगभग हर रोज़ ‘आप’ के कार्यकर्ताओं ने अभियान टोली के साथ बदसलूकी की, प्रचार सभाओं में बाधा पैदा करके मज़दूरों को तितर-बितर करने की कोशिश की। एक दिन एक प्रचार टोली से पर्चे छीन कर जलाये। यहाँ तक कि शाहाबाद डेयरी स्थित जिस शहीद भगतसिंह पुस्तकालय में स्त्री और पुरुष मज़दूरों की मीटिंगें और विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ करते हैं, रात में उसका बोर्ड कुछ लोग उतार ले गये। फिर वहाँ पत्थरबाजी भी की गयी। कल शाम को गाड़ी में सवार पीकर धुत्त ‘आप’ पार्टी के कुछ लोगों ने बादली में प्रचार टोली की स्त्री सदस्यों के साथ गाली-गलौज की और धमकियाँ दीं, फिर मज़दूरों के इकट्ठा होने पर वे वहाँ से चले गये!पहली बात, यही वह लोकतांत्रिक संस्कृति है, जिसकी केजरीवाल, सिसोदिया और योगेन्द्र यादव दुहाई देते नहीं थकते? मज़दूरों के नितान्त शान्तिपूर्ण आन्दोलन से इतनी बौखलाहट क्यों? आखिर मज़दूर माँग ही क्या रहे हैं? उनका मात्र इतना कहना है कि केजरीवाल ने मज़दूरों से जो वायदे किये थे, उन्हें पूरा करने के बारे में कुछ तो बोलें! वे तो सत्तासीन होने के बाद साँस-डकार ही नहीं ले रहे हैं।
घरों, झुग्गियों, बस्तियों, कारखानों से निकलो, चलो दिल्ली सचिवालय!
आज सुबह से ही उत्तर-पश्चिमी दिल्ली मज़दूर यूनियन और स्त्री मज़दूर संगठन के कार्यकर्ताओं ने मज़दूर मांगपत्रक आंदोलन के तहत अलग-अलग टोलियां बनाकर बाहरी दिल्ली के शाहाबाद डेयरी के डी, ई और एफ ब्लॉक की झुग्गी बस्तियों में तथा भोरगढ़ औद्योगिक क्षेत्र में गोलचक्क्र के पास प्रचार किया। कार्यकर्ताओं ने दिहाड़ी मज़दूरों, ठेका मज़दूरों, स्त्री मज़दूरों, झुग्गीवासियों का आह्वान करते हुए उन्हें कल यानी 6 फरवरी को सुबह 11 बजे भारी तादाद में दिल्ली सचिवालय पहुंचने के लिए कहा। विगत एक माह से निरंतर प्रचार के कारण उत्तर-पश्चिमी दिल्ली की अधिकांश मेहनतकश आबादी को इस आंदोलन के बारे में पता है और वे इसका व्यापक समर्थन कर रहे हैं।
6 फरवरी,11 बजे चलो दिल्ली सचिवालय। मेहनतकश ने जान लिया है हक लेना ठान लिया है।
आज करावल नगर, खजूरी खास और वजीरपुर में दिल्ली मजदूर यूनियन ने रिक्शे पर माइक टांग कर मजदूर मांगपत्रक आन्दोलन के तहत जुटान अभियान चलाया।
बाहरी दिल्ली में शाम को भी प्रचार-वाहन से प्रचार व जनसंपर्क
आज शाम को मज़दूर मांगपत्रक आन्दोलन के तहत उत्तर-पश्चिमी दिल्ली मज़दूर यूनियन और स्त्री मज़दूर संगठन के कार्यकर्ताओं ने रोहिणी के सेक्टर 26 व 27 की बस्तियों में प्रचार-वाहन से प्रचार किया व पर्चे बांटे। इसके अलावा नरेला औद्योगिक क्षेत्र के शाहपुर गढ़ी इलाके में जनसंपर्क किया और ‘6 फरवरी को दिल्ली सचिवालय चलो’ का आह्वान करने वाला पर्चा वितरित किया गया। सेक्टर-27, रोहिणी की बस्ती में प्रचार-वाहन द्वारा प्रचार करते समय नशे में धुत कार सवार ‘आप’ कार्यकर्ताओं ने अभियान के कार्यकर्ताओं से गाली-गलौज की। उन्होंने स्त्री मज़दूर संगठन की महिला साथियों से भी बदसलूकी की, बाद में विवाद बढ़ने पर अभियान के समर्थन में आसपास की व्यापक मज़दूर आबादी को एकजुट होते देख वे ‘आप’ कार्यकर्ता वहां गाली-गलौज करते और धमकियां देते हुए निकल गए। इसके बाद प्रचार-वाहन और अभियान के कार्यकर्ता आगे बढ़ गए और पूरी बस्ती में सघन प्रचार व पर्चा वितरण किया।
उत्तर-पश्चिमी दिल्ली में सड़कों पर उतरे प्रचार-वाहन
उत्तर-पश्चिमी दिल्ली मज़दूर यूनियन तथा स्त्री मज़दूर संगठन द्वारा चलाए जा रहे मज़दूर मांगपत्रक आंदोलन के तहत आज इस इलाके की व्यापक मज़दूर आबादी से अपनी विभिन्न मांगों के समर्थन में आगामी 6 फरवरी को लाखों की संख्या में दिल्ली सचिवालय पहुंचने का आह्वान किया गया। इसमें मुख्यत: समयपुर बादली औद्योगिक क्षेत्र, बवाना औद्योगिक क्षेत्र, नरेला-भोरगढ़ औद्योगिक क्षेत्र आदि शामिल हैं। समयपुर बादली में संजय कालोनी, सूरजपार्क, गड्ढा बस्ती तथा राजा विहार में और नरेला औद्योगिक क्षेत्र में विभिन्न ब्लॉकों, शाहपुर गढ़ी आदि क्षेत्रों में प्रचार-वाहन को बैनर, पोस्टर, लाल झण्डों से सजाकर माइक लगाकर सघन और गहन प्रचार चलाया गया।
समयपुर बादली के लेबर चौक और संजय कॉलोनी में प्रचार
लेबर चौक पर काम की तलाश में निकले मज़दूर सुबह कुछ नौजवानों को सिर पर और बाजुओं पर लाल पट्टी बांधे नारे लगाते देखकर पहले तो कुछ चौंक-से गए, लेकिन जब साथियों ने अपनी बात रखी और पर्चा बांटना शुरू किया तो चारों और मज़दूर इकट्ठा हो गए और पुरजोर तरीके से मज़दूरों की एकजुटता पर जोर दिया। इसके बाद यूनियन और स्त्री मज़दूर संगठन के कार्यकर्ता संजय कॉलोनी पहुंचे, जहां के हालात अन्य किसी भी उपेक्षित बस्ती से बहुत अलग नहीं थे। यहां भी बीच-बीच में सभाएं की गयीं और घर-घर जाकर ‘6 फरवरी को दिल्ली सचिवालय चलो’ अभियान के बारे में बताया गया। आज भी प्रचार अभियान के दौरान ‘आप’ के दो कार्यकर्ताओं से झड़प हुई जिससे साथियों ने विनम्रतापूर्वक अपनी बात कहकर टाल दिया। प्रचार अभियान के बाद कई मज़दूरों को साथ लेकर साथियों ने पूरे इलाके में मांगपत्रक आंदोलन के तहत 6 फरवरी को दिल्ली सचिवालय चलने के बारे में पोस्टर लगाए।
“मेहनतकश जन जागो, अपना हक लड़कर मांगो!”
मांगपत्रक आन्दोलन के तहत उत्तर-पश्चिमी दिल्ली मज़दूर यूनियन और स्त्री मज़दूर संगठन ने बादली औद्योगिक क्षेत्र के राजा विहार, सूरजपार्क, संजय कॉलोनी तथा रोहिणी सेक्टर 26 और 27 एवं शाहाबाद डेयरी की मज़दूर बस्ती के साथ ही नरेला-बवाना औद्योगिक क्षेत्र के बवाना जे.जे. कॉलोनी, मेट्रो विहार, होलंबी कलां, शाहपुर गढ़ी, भोरगढ़, नरेला जे.जे. कॉलोनी में मज़दूर जुटान की गति को तेज कर दिया है। इसी के तहत, आज सुबह शाहाबाद डेयरी के मदर डेयरी चौक पर पर्चा वितरण किया गया। ‘6 फरवरी को दिल्ली सचिवालय चलो’ के पर्चे को ‘आप’ कार्यकर्ताओं ने जलाने की कोशिश की, जिसे अभियान के साथियों और व्यापक मज़दूर आबादी ने नाकाम करते हुए मज़दूर एकता ज़िन्दाबाद के नारे भी लगाये।
उद्योग नगर, भीम नगर में मज़दूरों को ६ फरवरी का आह्वान
उद्योग नगर, भीम नगर में मज़दूरों को ६ फरवरी का आह्वान
मांगपत्रक आंदोलन: बाहरी दिल्ली में दीवार-लेखन और जनसभा व पर्चा वितरण जारी
कल रात उत्तर-पश्चिमी दिल्ली मज़दूर यूनियन तथा स्त्री मज़दूर संगठन मांगपत्रक आंदोलन की ओर से शाहाबाद डेयरी के बी-ब्लॉक बस स्टॉप के पास तथा सेक्टर-26 रोहिणी में दीवार लेखन किया गया तथा 6 फरवरी को मज़दूरों की मांगों के समर्थन में बड़ी संख्या में लोगों से ‘दिल्ली सचिवालय चलो’ का पर्चा वितरित किया गया। इसके बाद, आज सुबह शाहाबाद डेयरी के ई-ब्लॉक की झुग्गी बस्ती में प्रचार कार्य, जनसभाएं, पर्चा वितरण करके मांगपत्रक आंदोलन के बारे में बताया गया और एकजुट होकर दिल्ली सचिवालय पहुंचने का आह्वान किया गया।
बाहरी दिल्ली में विरोधी तत्वों द्वारा बाधित करने के बावजूद तेज हुआ मांगपत्रक अभियान
उत्तर-पश्चिमी दिल्ली मज़दूर यूनियन और स्त्री मज़दूर संगठन द्वारा चलाए जा रहे मांगपत्रक अभियान से बौखलाए मज़दूर विरोधी तत्व लगातार इस आंदोलन को बाधित करने की मुहिम में जुटे हुए हैं। इसी क्रम में, उन्होंने उत्तर-पश्चिमी दिल्ली में मांगपत्रक अभियान के शाहाबाद डेयरी स्थित संपर्क केंद्र ‘शहीद भगतसिंह पुस्तकालय’ के दीवार पर लगे बोर्ड को ही गायब कर दिया, जबकि वह बोर्ड ना तो बेचा जा सकता है और ना ही किसी अन्य उपयोग में आ सकता है, और इसी के आधार पर अभियान के कार्यकर्ताओं का अंदेशा है कि वह बोर्ड विरोधी तत्वों ने गायब किया है। इस पुस्तकालय में मजदूर परिवारों के बच्चों और स्त्रियों को पढ़ाने और उन्हें जागरूक बनाने का काम किया जाता है और अपने हकों-अधिकारों के लिए सचेत किया जाता है। वहां पर दर्जनों बच्चे और महिलाएं पढ़ने आते हैं। इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों में आक्रोश व्याप्त है।
बाहरी दिल्ली में मांगपत्रक अभियान जोरों पर, बौखलाए ‘आप’ कार्यकर्ताओं ने दी धमकियां
आज शाहाबाद डेयरी के अभियान में भी लगभग सभी सभाओं, गलियों में ‘आप’ के कार्यकर्ताओं-समर्थकों ने यूनियन औरस्त्री मज़दूर संगठन की कार्यकर्ताओं से बदतमीजी तक की और एक जगह गाली गलौज भी किया, जिनमें एक-दो जगह तो ये कार्यकर्ता या समर्थक सुबह सुबह शराब पीकर आए हुए थे। अभियान से जुड़े कार्यकर्ता उनसे पहले की ही तरह लगातार अनुरोध करते रहे कि हम लोग जनवादी तरीके से जनता के बीच अपनी बात लेकर जा रहे हैं, जिसका मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल खूब दुहाई देते हैं, आप लोग भी अपनी बात लेकर लोगों के बीच जाइए, हमें तंग करने के तरीके से आप अपनी ही पार्टी के’उसूलों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। वे अभियान के साथियों से कहने लगे कि आप लोग केजरीवाल को समय नहीं दे रहे हैं। इस पर, साथियों ने उन्हें विनम्रतापूर्वक बताया कि केजरीवाल मज़दूरों से किए गए वायदों को पूरा नहीं कर रहे हैं, जबकि डेढ़ महीने बीत चुके हैं और केजरीवाल सरकार मज़दूरों से किए गए वायदों को पूरा करने की कोई निश्चित समयावधि भी नहीं बता रही हैं। इसीलिए, मज़दूरों का यह कर्तव्य बनता है कि वे 6 फरवरी को दिल्ली सचिवालय पहुंच कर सरकार को इन वायदों पर अमल करने की याद दिलाएं।
शाहाबाद डेयरी के एफ ब्लॉक की झुग्गीबस्ती में घर-घर जाकर जनसंपर्क
इस बस्ती की हालत भी अन्य झुग्गीबस्तियों की तरह ही है, चारों ओर गंदगी फैली रहतीहै, झुग्गियां कच्ची हैं, यहां भी रिक्शेवाले, ठेलेवाले, दिहाड़ी मज़दूर, कारखाने के मज़दूर, घरों में साफ-सफाई का काम करने वाली स्त्रियां रहती हैं। सुबह कार्यकर्ताओं ने इस झुग्गीबस्ती के बीचों-बीच जाकर ज़ोरदार नारेबाजी और भाषण देने से आज के अभियान की शुरुआत की। साथियों ने कहा कि हमें केजरीवाल को उनके चुनावपूर्व वायदों को याद दिलाने के लिए और उन्हें जल्द से जल्द पूरा करने का दबाव बनाने के लिए एकजुट होकर लड़ना होगा। सरकार सिर्फ वायदे कर रही है और समितियां बना रही है, जिससे अन्य सरकारों की तरह ही समितियां बनाकर इन मांगों को टाला जा सके। हमें चौकस रहना होगा। इसके बाद उपस्थित लोगों को पर्चें बांटने के साथ ही 6 फरवरी को दिल्ली सचिवालय जाने के इच्छुक मज़दूरों के नाम-पते दर्ज किए गए। फिर स्त्री मज़दूर संगठन और उत्तर-पश्चिमी दिल्ली मज़दूर यूनियन के कार्यकर्ताओं ने एक-एक घर जाकर लोगों को इस पूरे आंदोलन के बारे में बताया और अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर लड़ने का आह्वान किया। बस्ती की व्यापक मेहनतकश आबादी ने 6 फरवरी को दिल्ली सचिवालय पहुंचने का वायदा किया।
केजरीवाल ने मज़दूरों से मिलने से किया इंकार
वज़ीरपुर कारखाना मज़दूर यूनियन के नेतृत्व में वज़ीरपुर के मज़दूरों का स्वागत केजरीवाल ने दिल्ली पुलिस के बैरिकैडों से किया। केजरीवाल ने मज़दूरों से मिलने से इंकार कर दिया। परन्तु जब मज़दूर अपनी मांगो पर अडिग रहे और बैरिकेड कि तरफ बढने लगे तब केजरीवाल के दफ्तर ने फरमान दिया कि यूनियन के सिर्फ चार प्रतिनिधि ही केजरीवाल से मिल सकते हैं परन्तु यूनियन के प्रतनिधियों से भी मुख्यमंत्री नहीं मिले और न ही उनका कोई प्रवक्ता, बस सरकारी दफ्तरों सरीखे मज़दूरों के मांगपत्रक पर एक ठप्पा लगा दिया गया। वज़ीरपुर के मज़दूर केजरीवाल से मिलकर अपनी फैक्टरियों और झुग्गियों की हालत के बारे में बताकर उन्हें अपना मांगपत्रक सौंपना चाहते थे परन्तु केजरीवाल मज़दूरों से इतना डर गए कि उन्होंने पुलिस को आगे कर दिया। यूनियन ने एलान किया कि आने वाली ६ फरवरी को जब दिल्ली भर के मज़दूर सचिवालय पहुंचेंगे तब वज़ीरपुर के मज़दूर फिर से अपनी मांगों को लेकर सचिवालय पहुंचंगे और तब दिल्ली पुलिस और उनके बेरिकेड मज़दूरों के सैलाब को नहीं रोक पाएंगे।
केजरीवाल की मज़दूरों से धोखाधड़ी
मुख्यमन्त्री केजरीवाल ने मज़दूरों से धोखाधड़ी अब खुलेआम शुरू कर दी है। केजरीवाल ने सत्ता में आने से पहले वायदा किया था कि दिल्ली से ठेका प्रथा ख़त्म कर दी जायेगी। लेकिन महीना बीत जाने के बाद भी ठेका मज़दूरी प्रथा के उन्मूलन के लिए कोई कानून नहीं पास किया गया है। जब ठेका मज़दूरों ने केजरीवाल को घेरना शुरू किया तो केजरीवाल ने ठेका मज़दूरी उन्मूलन की तकनीकी जाँच के लिए एक समिति बना दी थी! यह सिर्फ़ इसलिए किया गया है ताकि ठेका मज़दूरी उन्मूलन के काम को संसद चुनाव तक टाला जा सके। केजरीवाल को उम्मीद है कि चुनाव के बाद कांग्रेस उसकी सरकार को गिरा देगी! केजरीवाल संसद चुनावों के ‘मॉडल कोड’ लागू होने का इन्तज़ार कर रहे हैं और किसी तरह से समय काट रहे हैं। फरवरी मध्य तक ‘मॉडल कोड’ लागू हो जायेगा और फिर केजरीवाल सरकार ठेका प्रथा उन्मूलन का कोई भी कानून लाने से बच जायेगी। लेकिन उस समय तक ठेका मज़दूर केजरीवाल की जान बख़्श दें इसके लिए एक समिति गठित कर दी गयी है! पिछले 65 साल में कांग्रेस-भाजपा ने कमेटियाँ लोगों को उल्लू बनाने के लिए बनायी थीं। केजरीवाल भी अब यही कर रहा है।
बादली औद्योगिक क्षेत्र और डीटीसी के आंदोलनरत ठेकाकर्मियों के बीच चला मांगपत्रक अभियान
जब मांगपत्रक आन्दोलन से जुड़े कार्यकर्ता इन ठेका कर्मचारियेां की समस्या सुन रहे थे, और उनकी सलाह पर डिपो में 6 फरवरी के अभियान का पोस्टर लगा रहे थे, तभी सेक्टर-18 के डिपो नं 4 पर कार्यरत ‘आप’ समर्थक डीटीसी अधिकारियों ने उनसे झड़प शुरू कर दी, सुरक्षाकर्मियों को आदेश देकर पोस्टर फड़वा दिए और कहा कि आप लोग भाजपा और कांग्रेस के इशारे पर केजरीवाल व ‘आप’ के खिलाफ कर्मचारियों को भड़का रहे हैं। गौरतलब है कि इसी तरह की बातें कल के शाहाबाद डेयरी अभियान के दौरान भिड़े ‘आप’ समर्थकों ने कही थीं।
एक खबर के अनुसार, डीटीसी में लगभग 14,000 ड्राइवर, कंडक्टर ठेके पर हैं, इसके अलावा बड़ी संख्या में मैकेनिकल स्टाफ पर ठेके पर काम कर रहा है। लेकिन लंबे समय से नौकरी स्थायी करने, अच्छी वर्दी देने, तमाम भत्ते देने आदि मांगों को लेकर अधिकारियों, मंत्रियों से लेकर अनेक दरवाजों पर दस्तक दे चुके हैं, लेकिन स्थिति ज्यों कि त्यों बनी हुई है। इस बार, कल से ही मिलेनियम डिपो, इंद्रपस्थ पर तकरीबन 400 ठेका कर्मचारी धरने पर बैठे हुए हैं और उस धरने में शामिल होने वालों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। इसी की वजह से कई डीटीसी की कई बसें भी सड़क पर नहीं उतरीं।
शाहाबाद डेयरी में मांगपत्रक अभियान द्वारा जुझारू प्रचार
इसी मज़दूर बस्ती में आम आदमी पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं ने मांगपत्रक अभियान को बाधित करने की नाकाम कोशिश भी की। वे अभियान के साथियों से कहने लगे कि आप लोग केजरीवाल को समय नहीं दे रहे हैं। इस पर, साथियों ने उन्हें विनम्रतापूर्वक बताया कि केजरीवाल मज़दूरों से किए गए वायदों को पूरा नहीं कर रहे हैं, जबकि डेढ़ महीने बीत चुके हैं और केजरीवाल सरकार मज़दूरों से किए गए वायदों को पूरा करने की कोई निश्चित समयावधि भी नहीं बता रही हैं। इसीलिए, मज़दूरों का यह कर्तव्य बनता है कि वे 6 फरवरी को दिल्ली सचिवालय पहुंच कर सरकार को इन वायदों पर अमल करने की याद दिलाएं। अभियान के साथियों ने यह भी कहा कि आप पार्टी का तो मुख्य नारा ही भ्रष्टाचार से मुक्ति का है, लेकिन सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार तो श्रम-विभाग में व्याप्त है, जिससे दिल्ली की लगभग 60 लाख मज़दूर आबादी प्रभावित है। इसको खत्म करने के लिए भी सरकार ने कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया है। लिहाजा इन वायदों की याददिहानी के लिए लाखों मज़दूर 6 फरवरी को दिल्ली सचिवालय पर पहुंचेंगे, जैसाकि अरविन्द केजरीवाल ने भी यह कहा था कि आप हमें इन वायदों की याद दिलाते रहिए।
नरेला में जनसभा, पर्चा-वितरण, पोस्टर लगाने और मज़दूरों की बैठक के जरिए मांगपत्रक आन्दोलन की तैयारी
उत्तर-पश्चिमी दिल्ली मज़दूर यूनियन और स्त्री मज़दूर संगठन ने आज नरेला के लेबर चौक पर दिहाड़ी पर खटने वाले मज़दूरों के बीच नारे लगाकर सभा की और मांगपत्रक आन्दोलन के तहत 6 फरवरी को दिल्ली सचिवालय चलने के अभियान के बारे में बताते हुए, उन्हें एकजुट होकर लड़ने का आह्वान किया। इस दौरान पर्चा वितरण होता रहा और उसके बाद मज़दूरों के नाम-पते नोट किए गए। ये मज़दूर बेलदारी, राजमिस्त्री, पुताई, खेत मज़दूरी आदि का काम करते हैं और किसी भी प्रकार के श्रम कानूनों से इनका वास्ता नहीं रहता।
इसके बाद मांगपत्रक आन्दोलन का जत्था नरेला औद्योगिक क्षेत्र के पीर बाबा पार्क पहुंचा, जहां 11 बजे उत्तर-पश्चिमी दिल्ली मज़दूर यूनियन की बैठक शुरू हुई। इस बैठक में भोरगढ़, शाहपुर गढ़ी, होलंबी कलां, नरेला आदि क्षेत्रों के लगभग ढाई सौ मज़दूरों ने सक्रिय भागीदारी की। बैठक में 6 फरवरी को लाखों की तादाद में दिल्ली सचिवालय पहुंचने का प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित हुआ और व्यापक मज़दूर जुटान के लिए बड़ी संख्या में कारखाना और बस्ती केन्द्रित बैठकें करने पर ज़ोर दिया गया। बैठक में सभी साथियों ने इस बात पर सहमति जतायी कि ठेका प्रथा का खात्मा, न्यूनतम मज़दूरी, सभी श्रम कानूनों को लागू कराने सहित मज़दूर वर्ग की मुक्ति के लिए एक लम्बे जुझारू तथा निर्णायक संघर्ष की ज़रूरत है ताकि मेहनतकश समाज की स्थापना की जा सके।
उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के शाहाबाद डेयरी की बस्तियों में चला मांगपत्रक आन्दोलन अभियान
शाहाबाद डेयरी के एफ ब्लॉक स्थित पांच मंदिर के आसपास, व बी ब्लॉक में चले इस अभियान में व्यक्तिगत संपर्क व जनसभाओं के जरिए साथियों ने मज़दूरों को चुनाव पूर्व अरविंद केजरीवाल द्वारा गरीबों-मजदूरों के लिए किए गए वायदों के बारे में बताया, जिनके बारे में उन्होंने चुनाव जीतने के बाद चुप्पी साध ली है। यूनियन के साथियों ने इन वायदों की याददिहानी के लिए और उन्हें पूरा करने का दबाव बनाने के लिए 6 फरवरी को लाखों की तादाद में दिल्ली सचिवालय को घेरने का आह्वान किया। अपने जीवन और काम की बदतर स्थितियों को बदलने के लिए आक्रोशित बस्तीवासियों ने इस अभियान का पुरजोर समर्थन करते हुए कहा कि वे 6 फरवरी को दिल्ली सचिवालय जरूर पहुंचेंगे। इसके बाद सैकड़ों मजदूरों ने अपने नाम व पते दर्ज करवाए।