उत्तर-पश्चिमी दिल्ली मज़दूर यूनियन और स्त्री मज़दूर संगठन द्वारा चलाए जा रहे मांगपत्रक अभियान से बौखलाए मज़दूर विरोधी तत्व लगातार इस आंदोलन को बाधित करने की मुहिम में जुटे हुए हैं। इसी क्रम में, उन्होंने उत्तर-पश्चिमी दिल्ली में मांगपत्रक अभियान के शाहाबाद डेयरी स्थित संपर्क केंद्र ‘शहीद भगतसिंह पुस्तकालय’ के दीवार पर लगे बोर्ड को ही गायब कर दिया, जबकि वह बोर्ड ना तो बेचा जा सकता है और ना ही किसी अन्य उपयोग में आ सकता है, और इसी के आधार पर अभियान के कार्यकर्ताओं का अंदेशा है कि वह बोर्ड विरोधी तत्वों ने गायब किया है। इस पुस्तकालय में मजदूर परिवारों के बच्चों और स्त्रियों को पढ़ाने और उन्हें जागरूक बनाने का काम किया जाता है और अपने हकों-अधिकारों के लिए सचेत किया जाता है। वहां पर दर्जनों बच्चे और महिलाएं पढ़ने आते हैं। इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों में आक्रोश व्याप्त है।
बाहरी दिल्ली में मांगपत्रक अभियान जोरों पर, बौखलाए ‘आप’ कार्यकर्ताओं ने दी धमकियां
आज शाहाबाद डेयरी के अभियान में भी लगभग सभी सभाओं, गलियों में ‘आप’ के कार्यकर्ताओं-समर्थकों ने यूनियन औरस्त्री मज़दूर संगठन की कार्यकर्ताओं से बदतमीजी तक की और एक जगह गाली गलौज भी किया, जिनमें एक-दो जगह तो ये कार्यकर्ता या समर्थक सुबह सुबह शराब पीकर आए हुए थे। अभियान से जुड़े कार्यकर्ता उनसे पहले की ही तरह लगातार अनुरोध करते रहे कि हम लोग जनवादी तरीके से जनता के बीच अपनी बात लेकर जा रहे हैं, जिसका मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल खूब दुहाई देते हैं, आप लोग भी अपनी बात लेकर लोगों के बीच जाइए, हमें तंग करने के तरीके से आप अपनी ही पार्टी के’उसूलों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। वे अभियान के साथियों से कहने लगे कि आप लोग केजरीवाल को समय नहीं दे रहे हैं। इस पर, साथियों ने उन्हें विनम्रतापूर्वक बताया कि केजरीवाल मज़दूरों से किए गए वायदों को पूरा नहीं कर रहे हैं, जबकि डेढ़ महीने बीत चुके हैं और केजरीवाल सरकार मज़दूरों से किए गए वायदों को पूरा करने की कोई निश्चित समयावधि भी नहीं बता रही हैं। इसीलिए, मज़दूरों का यह कर्तव्य बनता है कि वे 6 फरवरी को दिल्ली सचिवालय पहुंच कर सरकार को इन वायदों पर अमल करने की याद दिलाएं।
शाहाबाद डेयरी के एफ ब्लॉक की झुग्गीबस्ती में घर-घर जाकर जनसंपर्क
इस बस्ती की हालत भी अन्य झुग्गीबस्तियों की तरह ही है, चारों ओर गंदगी फैली रहतीहै, झुग्गियां कच्ची हैं, यहां भी रिक्शेवाले, ठेलेवाले, दिहाड़ी मज़दूर, कारखाने के मज़दूर, घरों में साफ-सफाई का काम करने वाली स्त्रियां रहती हैं। सुबह कार्यकर्ताओं ने इस झुग्गीबस्ती के बीचों-बीच जाकर ज़ोरदार नारेबाजी और भाषण देने से आज के अभियान की शुरुआत की। साथियों ने कहा कि हमें केजरीवाल को उनके चुनावपूर्व वायदों को याद दिलाने के लिए और उन्हें जल्द से जल्द पूरा करने का दबाव बनाने के लिए एकजुट होकर लड़ना होगा। सरकार सिर्फ वायदे कर रही है और समितियां बना रही है, जिससे अन्य सरकारों की तरह ही समितियां बनाकर इन मांगों को टाला जा सके। हमें चौकस रहना होगा। इसके बाद उपस्थित लोगों को पर्चें बांटने के साथ ही 6 फरवरी को दिल्ली सचिवालय जाने के इच्छुक मज़दूरों के नाम-पते दर्ज किए गए। फिर स्त्री मज़दूर संगठन और उत्तर-पश्चिमी दिल्ली मज़दूर यूनियन के कार्यकर्ताओं ने एक-एक घर जाकर लोगों को इस पूरे आंदोलन के बारे में बताया और अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर लड़ने का आह्वान किया। बस्ती की व्यापक मेहनतकश आबादी ने 6 फरवरी को दिल्ली सचिवालय पहुंचने का वायदा किया।
केजरीवाल ने मज़दूरों से मिलने से किया इंकार
वज़ीरपुर कारखाना मज़दूर यूनियन के नेतृत्व में वज़ीरपुर के मज़दूरों का स्वागत केजरीवाल ने दिल्ली पुलिस के बैरिकैडों से किया। केजरीवाल ने मज़दूरों से मिलने से इंकार कर दिया। परन्तु जब मज़दूर अपनी मांगो पर अडिग रहे और बैरिकेड कि तरफ बढने लगे तब केजरीवाल के दफ्तर ने फरमान दिया कि यूनियन के सिर्फ चार प्रतिनिधि ही केजरीवाल से मिल सकते हैं परन्तु यूनियन के प्रतनिधियों से भी मुख्यमंत्री नहीं मिले और न ही उनका कोई प्रवक्ता, बस सरकारी दफ्तरों सरीखे मज़दूरों के मांगपत्रक पर एक ठप्पा लगा दिया गया। वज़ीरपुर के मज़दूर केजरीवाल से मिलकर अपनी फैक्टरियों और झुग्गियों की हालत के बारे में बताकर उन्हें अपना मांगपत्रक सौंपना चाहते थे परन्तु केजरीवाल मज़दूरों से इतना डर गए कि उन्होंने पुलिस को आगे कर दिया। यूनियन ने एलान किया कि आने वाली ६ फरवरी को जब दिल्ली भर के मज़दूर सचिवालय पहुंचेंगे तब वज़ीरपुर के मज़दूर फिर से अपनी मांगों को लेकर सचिवालय पहुंचंगे और तब दिल्ली पुलिस और उनके बेरिकेड मज़दूरों के सैलाब को नहीं रोक पाएंगे।
केजरीवाल की मज़दूरों से धोखाधड़ी
मुख्यमन्त्री केजरीवाल ने मज़दूरों से धोखाधड़ी अब खुलेआम शुरू कर दी है। केजरीवाल ने सत्ता में आने से पहले वायदा किया था कि दिल्ली से ठेका प्रथा ख़त्म कर दी जायेगी। लेकिन महीना बीत जाने के बाद भी ठेका मज़दूरी प्रथा के उन्मूलन के लिए कोई कानून नहीं पास किया गया है। जब ठेका मज़दूरों ने केजरीवाल को घेरना शुरू किया तो केजरीवाल ने ठेका मज़दूरी उन्मूलन की तकनीकी जाँच के लिए एक समिति बना दी थी! यह सिर्फ़ इसलिए किया गया है ताकि ठेका मज़दूरी उन्मूलन के काम को संसद चुनाव तक टाला जा सके। केजरीवाल को उम्मीद है कि चुनाव के बाद कांग्रेस उसकी सरकार को गिरा देगी! केजरीवाल संसद चुनावों के ‘मॉडल कोड’ लागू होने का इन्तज़ार कर रहे हैं और किसी तरह से समय काट रहे हैं। फरवरी मध्य तक ‘मॉडल कोड’ लागू हो जायेगा और फिर केजरीवाल सरकार ठेका प्रथा उन्मूलन का कोई भी कानून लाने से बच जायेगी। लेकिन उस समय तक ठेका मज़दूर केजरीवाल की जान बख़्श दें इसके लिए एक समिति गठित कर दी गयी है! पिछले 65 साल में कांग्रेस-भाजपा ने कमेटियाँ लोगों को उल्लू बनाने के लिए बनायी थीं। केजरीवाल भी अब यही कर रहा है।
बादली औद्योगिक क्षेत्र और डीटीसी के आंदोलनरत ठेकाकर्मियों के बीच चला मांगपत्रक अभियान
जब मांगपत्रक आन्दोलन से जुड़े कार्यकर्ता इन ठेका कर्मचारियेां की समस्या सुन रहे थे, और उनकी सलाह पर डिपो में 6 फरवरी के अभियान का पोस्टर लगा रहे थे, तभी सेक्टर-18 के डिपो नं 4 पर कार्यरत ‘आप’ समर्थक डीटीसी अधिकारियों ने उनसे झड़प शुरू कर दी, सुरक्षाकर्मियों को आदेश देकर पोस्टर फड़वा दिए और कहा कि आप लोग भाजपा और कांग्रेस के इशारे पर केजरीवाल व ‘आप’ के खिलाफ कर्मचारियों को भड़का रहे हैं। गौरतलब है कि इसी तरह की बातें कल के शाहाबाद डेयरी अभियान के दौरान भिड़े ‘आप’ समर्थकों ने कही थीं।
एक खबर के अनुसार, डीटीसी में लगभग 14,000 ड्राइवर, कंडक्टर ठेके पर हैं, इसके अलावा बड़ी संख्या में मैकेनिकल स्टाफ पर ठेके पर काम कर रहा है। लेकिन लंबे समय से नौकरी स्थायी करने, अच्छी वर्दी देने, तमाम भत्ते देने आदि मांगों को लेकर अधिकारियों, मंत्रियों से लेकर अनेक दरवाजों पर दस्तक दे चुके हैं, लेकिन स्थिति ज्यों कि त्यों बनी हुई है। इस बार, कल से ही मिलेनियम डिपो, इंद्रपस्थ पर तकरीबन 400 ठेका कर्मचारी धरने पर बैठे हुए हैं और उस धरने में शामिल होने वालों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। इसी की वजह से कई डीटीसी की कई बसें भी सड़क पर नहीं उतरीं।
शाहाबाद डेयरी में मांगपत्रक अभियान द्वारा जुझारू प्रचार
इसी मज़दूर बस्ती में आम आदमी पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं ने मांगपत्रक अभियान को बाधित करने की नाकाम कोशिश भी की। वे अभियान के साथियों से कहने लगे कि आप लोग केजरीवाल को समय नहीं दे रहे हैं। इस पर, साथियों ने उन्हें विनम्रतापूर्वक बताया कि केजरीवाल मज़दूरों से किए गए वायदों को पूरा नहीं कर रहे हैं, जबकि डेढ़ महीने बीत चुके हैं और केजरीवाल सरकार मज़दूरों से किए गए वायदों को पूरा करने की कोई निश्चित समयावधि भी नहीं बता रही हैं। इसीलिए, मज़दूरों का यह कर्तव्य बनता है कि वे 6 फरवरी को दिल्ली सचिवालय पहुंच कर सरकार को इन वायदों पर अमल करने की याद दिलाएं। अभियान के साथियों ने यह भी कहा कि आप पार्टी का तो मुख्य नारा ही भ्रष्टाचार से मुक्ति का है, लेकिन सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार तो श्रम-विभाग में व्याप्त है, जिससे दिल्ली की लगभग 60 लाख मज़दूर आबादी प्रभावित है। इसको खत्म करने के लिए भी सरकार ने कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया है। लिहाजा इन वायदों की याददिहानी के लिए लाखों मज़दूर 6 फरवरी को दिल्ली सचिवालय पर पहुंचेंगे, जैसाकि अरविन्द केजरीवाल ने भी यह कहा था कि आप हमें इन वायदों की याद दिलाते रहिए।
नरेला में जनसभा, पर्चा-वितरण, पोस्टर लगाने और मज़दूरों की बैठक के जरिए मांगपत्रक आन्दोलन की तैयारी
उत्तर-पश्चिमी दिल्ली मज़दूर यूनियन और स्त्री मज़दूर संगठन ने आज नरेला के लेबर चौक पर दिहाड़ी पर खटने वाले मज़दूरों के बीच नारे लगाकर सभा की और मांगपत्रक आन्दोलन के तहत 6 फरवरी को दिल्ली सचिवालय चलने के अभियान के बारे में बताते हुए, उन्हें एकजुट होकर लड़ने का आह्वान किया। इस दौरान पर्चा वितरण होता रहा और उसके बाद मज़दूरों के नाम-पते नोट किए गए। ये मज़दूर बेलदारी, राजमिस्त्री, पुताई, खेत मज़दूरी आदि का काम करते हैं और किसी भी प्रकार के श्रम कानूनों से इनका वास्ता नहीं रहता।
इसके बाद मांगपत्रक आन्दोलन का जत्था नरेला औद्योगिक क्षेत्र के पीर बाबा पार्क पहुंचा, जहां 11 बजे उत्तर-पश्चिमी दिल्ली मज़दूर यूनियन की बैठक शुरू हुई। इस बैठक में भोरगढ़, शाहपुर गढ़ी, होलंबी कलां, नरेला आदि क्षेत्रों के लगभग ढाई सौ मज़दूरों ने सक्रिय भागीदारी की। बैठक में 6 फरवरी को लाखों की तादाद में दिल्ली सचिवालय पहुंचने का प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित हुआ और व्यापक मज़दूर जुटान के लिए बड़ी संख्या में कारखाना और बस्ती केन्द्रित बैठकें करने पर ज़ोर दिया गया। बैठक में सभी साथियों ने इस बात पर सहमति जतायी कि ठेका प्रथा का खात्मा, न्यूनतम मज़दूरी, सभी श्रम कानूनों को लागू कराने सहित मज़दूर वर्ग की मुक्ति के लिए एक लम्बे जुझारू तथा निर्णायक संघर्ष की ज़रूरत है ताकि मेहनतकश समाज की स्थापना की जा सके।
उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के शाहाबाद डेयरी की बस्तियों में चला मांगपत्रक आन्दोलन अभियान
शाहाबाद डेयरी के एफ ब्लॉक स्थित पांच मंदिर के आसपास, व बी ब्लॉक में चले इस अभियान में व्यक्तिगत संपर्क व जनसभाओं के जरिए साथियों ने मज़दूरों को चुनाव पूर्व अरविंद केजरीवाल द्वारा गरीबों-मजदूरों के लिए किए गए वायदों के बारे में बताया, जिनके बारे में उन्होंने चुनाव जीतने के बाद चुप्पी साध ली है। यूनियन के साथियों ने इन वायदों की याददिहानी के लिए और उन्हें पूरा करने का दबाव बनाने के लिए 6 फरवरी को लाखों की तादाद में दिल्ली सचिवालय को घेरने का आह्वान किया। अपने जीवन और काम की बदतर स्थितियों को बदलने के लिए आक्रोशित बस्तीवासियों ने इस अभियान का पुरजोर समर्थन करते हुए कहा कि वे 6 फरवरी को दिल्ली सचिवालय जरूर पहुंचेंगे। इसके बाद सैकड़ों मजदूरों ने अपने नाम व पते दर्ज करवाए।
उत्तर-पश्चिमी दिल्ली में सघन और व्यापक हुआ मज़दूर मांगपत्रक आन्दोलन का अभियान
अगले माह की 6 तारीख को दिल्ली सचिवालय पहुंचकर मुख्यमंत्री केजरीवाल को मज़दूरों की मांगने सौंपने की तारीख करीब आने के साथ-साथ दिल्ली का मज़दूर मांगपत्रक आन्दोलन भी सघन और व्यापक होता जा रहा है। जगह-जगह पोस्टर लगाए जा रहे हैं, मज़दूरों से संपर्क किया जा रहा है, जनसभाएं, पर्चा-वितरण आदि पहले की तरह जारी हैं। आज इसी क्रम में उत्तर-पश्चिमी दिल्ली मज़दूर यूनियन व स्त्री मज़दूर संगठन के कार्यकर्ता बादली रेलवे स्टेशन, बादली आद्योगिक क्षेत्र, सेक्टर 27, रोहिणी की बस्ती पहुंचे।
बाहरी दिल्ली के मेट्रो विहार के मज़दूरों के बीच पहुंचा मज़दूर मांगपत्रक आन्दोलन
लगभग एक लाख की मज़दूर आबादी वाली मेट्रो विहार की बस्ती में अन्य सभी गरीब बस्तियों की तरह शिक्षा का निचला स्तर, पीने के साफ पानी की कमी, सार्वजनिक शौचालयों की बदतर स्थिति, पन्नियों के दलदल से भरी हुई बजबजाती नालियां, बदबू मारते यहां-वहां पड़े हएु कूड़े के ढेर का साम्राज्य कायम है। ऊपर से मकान-मालिकों और दलालों-ठेकेदारों की गुण्डागर्दी अलग। यहां रहने वाले लोग लगभग 10 साल पहले दिल्ली के विभिन्न इलाकों लक्ष्मीनगर, शकरपुर, आईटीओ, बापूधाम, बड़ा बाग, पश्चिम विहार, कैम्प आदि से उजड़कर आये हुए परिवार हैं, जो पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश आदि जगहों से विस्थापित हुए थे या यूं कहें कि पूंजी की मार से अपने जगह-जमीन से उजड़कर शहर में आकर व्यापक मेहनतकश आबादी का हिस्सा बन गये।
भोरगढ़ औद्योगिक क्षेत्र पहुंचा दिल्ली के मांगपत्रक आन्दोलन का जत्था
काम के लिए यहां से गुजरती आबादी को देखकर बरबस ही चार्ली-चैपलिन की फिल्म ‘मॉडर्न टाइम्स’ की याद आ जाती है। ये मज़दूर आबादी इक्कसवीं सदी में भी दोहरी गुलामी झेलने को मजबूर है और एक तरफ कारखाना मालिकों की गालियों, डांट-फटकार, घूसे-थप्पड़ की मार, तो दूसरी तरफ भोरगढ़ गांव के मकान मालिकों के ऑक्टोपसी पंजे के बीच फंसे रहने को मजबूर है। यहां के मकान मालिक मनमाने रेट पर बिजली का भुगतान करते हैं तथा अपने घरों में खोली हुई दुकानों से ही राशन व अन्य सामान लेने के लिए मजबूर करते हैं। ऐसा ना करने पर मज़दूरों से मकान खाली करवा लेते हैं। कारखाना मालिक तो उन्हें मनमाने तरीके से गुलामों-जानवरों की खटाते ही हैं। दलाल तथा गद्दार ट्रेड यूनियनों की करतूतों से भी यहां की व्यापक मज़दूर आबादी निराश-हताश है। इन मज़दूरों के चेहरे पर इस छटपटाहट की शिनाख़्त की जा सकती है। बस एक सब्र का बांध है जिसने इनके गुस्से को फूटकर धधकते लावे की तरह बहकर बाहर निकलने से रोका हुआ है। आज सुबह जब यूनियन के कार्यकर्ता उनके बीच पहुंचे तो काम पर पहुंचने की जल्दी के बावजूद उन्होंने साथियों की बात सुनी, पर्चे लिए और अपने नाम व पते नोट कराए।
बाहरी दिल्ली की सर्वाधिक उपेक्षित बस्ती सेक्टर-27, रोहिणी में पहुंचे मांगपत्रक आन्दोलन के कार्यकर्ता
सेक्टर-27 की बस्ती बरसों से सर्वाधिक उपेक्षित बस्तियों में से एक बनी हुई है। ना तो यहां आने-जाने के लिए सड़क है, ना गंदे पानी की निकासी की व्यवस्था, ना बच्चों के खेलने के लिए पार्क, ना पुलिस चौकी, ना परिवहन के नियमित साधन। यहां रहने वाले मजदूर सुबह टैम्पों में भरकर मायापुरी, नारायणा आदि के कारखानों में काम करने जाते हैं, तो कुछ बादली, शाहाबाद डेयरी, बवाना, नरेला, होलंबी कला के उद्योगों में काम करने जाते हैं या आसपास के इलाकों में बेलदारी, पल्लेदारी आदि का काम करते हैं। उन्होंने इस बात की ताईद की कि किसी भी कारखाने में श्रम कानून लागू नहीं होते और उनके साथ जानवरों जैसा बर्ताव किया जाता है। महिलाओं को तो दोहरी मार झेलनी पड़ती है। उनके लिए कोई सुविधा नहीं होती। लेकिन जिंदा रहने के लिए और अपने बच्चे पालने के लिए उन्हें यह सब झेलना पड़ता है।
होलंबी कलां रेलवे स्टेशन पर दस्तक दी दिल्ली मांगपत्रक आन्दोलन ने
आज जब होलंबी कला का रेलवे स्टेशन कोहरे से ढका हुआ था और सैकड़ो मज़दूर वहां आ-जा रहे थे, उसी समय उत्तर-पश्चिमी दिल्ली मज़दूर यूनियन और स्त्री मज़दूर संगठन के कार्यकर्ताओं ने वहां पहुंच कर जोरदार नारे लगाने शुरू किए। देखते ही देखते स्त्री-पुरुष मजदूरों ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया। फिर यूनियन के साथियों ने वहां भाषण देकर उन्हें दिल्ली मांगपत्रक अभियान के बारे में बताया और 6 फरवरी को दिल्ली सचिवालय पर दस्तक देने का आह्वान करने वाले पर्चे बांटे और उनके नाम-पते नोट किए व समस्याएं सुनीं।
यूनियन के साथियों ने कहा कि पहली बार दिल्ली में किसी सरकार या मुख्यमन्त्री ने मज़दूरों से कुछ ठोस वायदे किये हैं। लेकिन ये सभी वायदे अपने आप पूरे नहीं हो जायेंगे। हम मज़दूरों को हमसे किये गये वायदों की याददिहानी करानी होगी। बिना जन-दबाव के शायद ही दिल्ली सरकार ये वायदे पूरे करे। अगर अब भी हम इन वायदों को पूरा करवाने के लिए एकजुट होकर सरकार पर दबाव नहीं बनाते तो फिर हमारी बदहाली, ग़रीबी और तंगहाली के लिए सिर्फ़ हम जि़म्मेदार होंगे।
शाहाबाद डेयरी और रोहिणी सेक्टर-26 में चला मांगपत्रक अभियान
उत्तरी-पश्चिमी दिल्ली मज़दूर यूनियन और स्त्री मज़दूर संगठन ने ‘मांगपत्रक आन्दोलन’ के तहत रोहिणी के सेक्टर-26 और शाहाबाद डेयरी के बी ब्लॉक में अभियान चलाकर पर्चे बांटे, जनसभाएं की और घर-घर जाकर संपर्क किया। कार्यकर्ताओं ने सभी को मुख्यमंत्री केजरीवाल द्वारा चुनाव से पहले मजदूरों के लिए किए वायदे याद दिलाने के लिए 6 फरवरी को दिल्ली सचिवालय पर इकट्ठा होने का आह्वान किया।
उत्तर-पश्चिमी दिल्ली में 18 और 19 जनवरी को शाहाबाद डेयरी और रोहिणी सेक्टर-26 में चले अभियान के तहत जगह-जगह जनसभाएं करके पर्चा वितरण, जनसंपर्क किया गया। हर जगह गरीब-मजदूर आबादी ने बताया कि उन्हें श्रम कानून के तहत अन्य सुविधाएं तो मिलना दूर रहा, न्यूनतम मज़दूरी तक नहीं मिलती है। इन अभियानों में महिलाओं ने भी 6 फरवरी को दिल्ली सचिवालय पर चलने के लिए अपने नाम लिखवाए और खुद कहा कि जब तक हम मिलकर लड़ेंगे नहीं तब तक हमें अधिकार नहीं मिलने वाले और मालिक लोग हमें कीड़े-मकोड़े से ज्यादा नहीं समझते।
पीरागढ़ी में मज़दूर मांगपत्रक आंदोलन
वैसे तो पीरागढ़ी दिल्ली में जूतों के उत्पादन के लिए मशहूर है। एक्शन, कैम्पस से लेकर छोटी बड़ी सैकड़ों जूतों की व गारमेंट की कम्पनियां हैं जो दिल्ली के खाते पीते वर्ग की ज़रूरतों को पूरा करती हैं। परन्तु इन फैक्टरियों में काम करने वाले लाखों मज़दूरों के साथ बर्बर किस्म का शोषण होता है। ‘आप’ कि राखी बिड़ला खुद मंगोल पूरी क्षेत्र से विधायक हैं पर इन्हे मज़दूरो के उत्पीड़न से कोई फर्क नहीं पड़ता है। 2011 में ही पीरागढ़ी की H-9 फैक्ट्री में सुरक्षा में लापरवाही की वजह से 70 से अधिक मज़दूर जल कर मर गए थे पर प्रशासन मालिक को बचाने में लगा रहा था। यह फिर से दोहराया न जाये इसीलिए उद्योग नगर मज़दूर यूनियन और मंगोलपूरी मज़दूर यूनियन ने मज़दूरों के बीच मज़दूर मांगपत्रक आंदोलन चलाया जिससे कि आने वाली 6 फरवरी को केजरीवाल की सरकार इस बात की गारंटी करे कि पीरागढ़ी के मज़दूर भी अपने हक़ हासिल करें।
उत्तर-पश्चिमी दिल्ली में सघन प्रचार व संपर्क अभियान
बवाना, भोरगढ़, नरेला,मेट्रो विहार, होलम्बी कलां, शाहाबाद डेयरी, बादली, राजा विहार, सूरज पार्क,रोहिणी सेक्टर 26-27 आदि इलाकों में आम नागरिकों, गरीब मेहनतकशों-मज़दूरों को रोज़ समस्याओं का सामना करना पड़ता है और उन्हें बुनियादी सुविधाएँ और अपने क़ानूनी श्रम अधिकार तक नहीं मिलते। इस पूरे इलाके में गन्दे पानी की निकासी, शौचालयों की कमी और साफ-सफाई, पार्कों की खस्ता हालत, पानी की सप्लाई, कारख़ानों में मालिकों-ठेकेदारों की लूट और अंधेरगर्दी,सड़कों की ख़राब हालत, स्कूल और डिस्पेंसरी की कमी, महिलाओं से छेड़खानी, गरीबों तक से छीना-झपटी, मारपीट, पुलिस की मनमानी और उत्पीड़न जैसी समस्याएँ रोज़ की बात हैं।
मुस्तफाबाद में मज़दूर मांगपत्रक अभियान
दिल्ली मज़दूर यूनियन और करावल नगर मज़दूर यूनियन ने मुस्तफाबाद में अभियान चलाया। मुस्तफाबाद के घर घर में खुले हुए वर्क शॉपों या दुकानो में हजारो मज़दूरो के लिए श्रम कानून सुनने में अनजाना लगता है। सचिवालय से निकले फैसले इन गलियों को दिल्ली में ढूंढ नहीं पाते हैं। केजरीवाल के मंत्रालय ने मेट्रो मज़दूरो से 13 जनवरी को वायदा किया कि वो दिल्ली में ठेकाकरण ख़त्म करेंगे और सुनिश्चित करेंगे कि मज़दूरो को उनके हक़ मिले। इस हक़ को सुनिश्चित करने के लिए मुस्तफाबाद,खजूरी और करावल नगर के मज़दूर भी अपनी समस्यायों को लेकर 6 फरवरी को केजरीवाल के दफ्तर, दिल्ली सचिवालय चलेंगे।
करावलनगर, खजूरी में मांगपत्रक आंदोलन का आगाज़
करावलनगर, खजूरी में मांगपत्रक आंदोलन का आगाज़ 9 और 10 जनवरी को मांगपत्रक आंदोलन करावलनगर और खजूरी के मज़दूरों के बीच करावलनगर मज़दूर यूनियन और दिल्ली मज़दूर यूनियन के नेतृत्व में चलाया गया। करावल नगर और खजूरी में लाखों की तादाद में मज़दूर रहते हैं लेकिन यह दिल्ली के वे…
माँगपत्रक आन्दोलन की ओर से दिल्ली के सभी मज़दूरों को इंक़लाबी ललकार!
पहली बार दिल्ली में किसी सरकार या मुख्यमन्त्री ने मज़दूरों से कुछ ठोस वायदे किये हैं। लेकिन ये सभी वायदे अपने आप पूरे नहीं हो जायेंगे। हम मज़दूरों को हमसे किये गये वायदों की याददिहानी करानी होगी। क्योंकि बिना जन-दबाव के शायद ही दिल्ली सरकार ये वायदे पूरे करे। सरकार ये वायदे पूरे करके हम पर कोई अहसान नहीं करेगी, क्योंकि ये तो दशकों पहले पूरे हो जाने चाहिए थे। अगर अब भी हम इन वायदों को पूरा करवाने के लिए एकजुट होकर सरकार पर दबाव नहीं बनाते तो फिर हमारी बदहाली, ग़रीबी और तंगहाली के लिए सिर्फ़ हम जि़म्मेदार होंगे! 6 फरवरी को दिल्ली के लाखों मज़दूर दिल्ली सचिवालय पर इकट्ठा हो रहे हैं। ‘दिल्ली मज़दूर यूनियन’ आह्वान करती है कि आप भी इस आन्दोलन में शामिल हों और इन वायदों पर केजरीवाल सरकार से अमल करवायें!