6 मार्च को दिल्ली के दिल में उतरी मजदूर वर्ग की एकजुट ताकत की महा रैली!

दिल्ली के हज़ारो मज़दूर 6  मार्च को अपने हक़ और अधिकारों को हासिल करने के लिए सड़कों पर उतरे। मोदी सरकार के ‘अच्छे दिनों’ की पोल आज आम जनता के सामने खुल चुकी है और साथ ही केजरीवाल सरकार द्वारा दिल्ली के मज़दूरों से किये वादों की असलियत भी जग ज़ाहिर है।‘दिल्ली मज़दूर यूनियन’ के बैनर तले 6  मार्च को दिल्ली के हजारों मज़दूरों ने केन्द्र की मोदी सरकार और दिल्ली की केजरीवाल सरकार के समक्ष अपनी माँगों को लेकर नई दिल्ली के जन्तर-मन्तर पर विशाल प्रदर्शन किया फिर यहीं मज़दूरों की महापंचायत आयोजित की गई। इस मज़दूर पंचायत के बाद मोदी और केजरीवाल का पुतला दहन भी किया गया।

6 मार्च – ‘दिल्ली मज़दूर महापंचायत’ में हज़ारों-हज़ार की संख्या में शामिल हो!!

दो सालों में दिल्ली की मज़दूर और ग़रीब आबादी को दो शब्दों ने बहुत बेवकूफ बनाया है-‘अच्छे दिन’ और ‘आम आदमी’! ‘अच्छे दिनों’ और ‘आम आदमी’ का मंत्र जपने वाले देश के प्रधनमंत्री नरेन्द्र मोदी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने इन दो सालों में दिल्ली के मेहनतकशों के साथ ऐसा बर्ताव किया है जैसा सड़क चलते बटमार और उठाईगीरे भी नहीं करते। ये दोनों ही सरकारें आम मेहनतकशों के हक़-अधिकार एक-एक करके छीन रही हैं। साथ ही लोगों को उल्लू बनाने के लिए आपस में झगड़े की नौटंकी भी खूब कर रही हैं। लेकिन, सच तो यह है कि मोदी और केजरीवाल एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।फर्क बस इतना है कि जो काम मोदी पूँजीपतियों और कॉरपोरेट घरानों के लिए डंके की चोट पर करता है वही काम केजरीवाल थोड़ा छुप-छुपाकर करता है। लेकिन, हम मज़दूरों के प्रति इनके रवैये में कोई फर्क नहीं है।

दिल्ली की जनता से किये गये वायदों को पूरा करने में नाकाम केजरीवाल सरकार कुर्सी छोड़कर भागी

केजरीवाल सरकार शुरू से ही सरकार गिर जाने का मौका तलाश रही थी क्योंकि ‘केजरीवाल एण्ड पार्टी’ को पता था कि सरकार बनते ही असलियत उजागर हो जायेगी! इस्तीफ़ा-नौटंकी के बाद अब केजरीवाल ‘कुरबानी और शहादत’ का मीडिया ड्रामा करेंगे और जनता को मूर्ख बनाने का प्रयास करेंगे। हमें समझने की ज़रूरत है कि केजरीवाल की ‘आप’ और कांग्रेस, भाजपा व अन्य चुनावी पार्टियों में कोई अन्तर नहीं है। जब भी पूरी व्यवस्था और उसे चलाने वाली तमाम लुटेरी चुनावी पार्टियाँ बिल्कुल नंगी हो जाती हैं, तो व्यवस्था को किसी ‘श्रीमान सुथरा’ की ज़रूरत होती है। पहले इस ज़रूरत को मोरारजी देसाई सरकार ने पूरा किया था। आज इस ज़रूरत को ‘केजरीवाल एण्ड पार्टी’ पूरा कर रही है। ऐसा न हो तो जनता व्यवस्था की चौहद्दियों को तोड़ने और बग़ावत व इंक़लाब के बारे में सोच सकती है! इसलिए लुटेरी व्यवस्था को कोई ऐसा नौटंकीबाज़ चाहिए होता है जो अपने आपको ‘ईमानदारी का बुत’ बताये, कुछ गर्म बातें व कुछ प्रतीकात्मक हरक़तें करे, सेफ्टीवॉल्व (केजरीवॉल्व?!) के समान जनता के गुस्से को कारपोरेट मीडिया की सीटी बजा-बजाकर निकाल दे व व्यवस्था के प्रेशर कुकर को फटने से बचा ले! कांग्रेस, भाजपा, सपा, बसपा, माकपा, भाकपा, जदयू आदि जैसी खुली लुटेरी पार्टियाँ सामने फन काढ़े नाग के समान हैं, लेकिन ‘आम आदमी पार्टी’ घास में छिपे ज़हरीले साँप के समान है। बेहतर है कि हम डसे जाने से पहले समझ लें और अपना इंक़लाबी विकल्प खड़ा करने का काम शुरू करें!

Thousands of workers stage demonstration at Delhi secretariat for enacting Contract System abolition Act

Kejriwal government’s character has been exposed today. It is totally against workers. The Aam Aadmi Party is now publically turning its face away from the promises it had made in the election manifesto. To escape from the promise of abolishing the contract labour system, Kejriwal government has formed a committee which will carry out investigation on contract labour. Delhi government already has all the information about the contract labourers of Delhi. Nothing is left to be investigated at this point. What Kejriwal government had to do was to enact a contract labour system abolition legislation in Delhi as against a weak central act. But instead it has chosen to take the beaten path of forming committees. It in itself shows that the Kejriwal government’s promise to abolish the contract labour system was a betrayal with the labourers.

ठेका प्रथा उन्मूलन विधेयक पारित कराने के लिए दिल्ली सचिवालय पर हज़ारों मज़दूरों का विशाल प्रदर्शन

आज केजरीवाल सरकार का चरित्र साफ़ हो गया है। यह पूर्ण रूप से मज़दूर विरोधी है। अपने चुनावी घोषणापत्र में आम आदमी पार्टी ने मज़दूरों से जो-जो वायदे किये थे, वह अब उनसे खुलेआम मुकर रही है। ठेका प्रथा ख़ात्मे के काम से बचने के लिए केजरीवाल सरकार ने एक समिति का गठन किया है जो कि ठेका मज़दूरी पर जाँच करेगी। दिल्ली सरकार के पास पहले ही दिल्ली के ठेका मज़दूरों के बारे में पूरी सूचना है। अब जाँच करने के लिए कुछ भी नहीं है। केजरीवाल सरकार को जो करना था वह यह था कि कमज़ोर केन्द्रीय एक्ट के बरक्स दिल्ली राज्य में एक अलग ठेका प्रथा उन्मूलन विधेयक पारित करवाया जाय। लेकिन इसकी बजाय ‘कमेटी-कमेटी’ का खेल खेला जा रहा है। इसी से पता चलता है कि मज़दूरों से ठेका प्रथा के उन्मूलन का केजरीवाल सरकार का वायदा मज़दूरों के साथ एक धोखा था।

केजरीवाल की पार्टी की गुण्‍डागर्दी का विरोध करें, इनके असली चेहरे को पहचानें, दिल्‍ली के मज़दूरों की न्‍यायसंगत माँगों का पुरजोर समर्थन करें!

इस आन्‍दोलन से आम आदमी पार्टी को इतनी बौखलाहट क्‍यों है कि आन्‍दोलन की अभियान टोलियों के साथ जगह-जगह उनके कार्यकर्ता उलझ रहे हैं, गाली-गलौज कर रहे हैं और पर्चे जला रहे हैं। पिछले एक हफ्ते से उत्‍तर-पश्चिमी दिल्‍ली क्षेत्र में लगभग हर रोज़ ‘आप’ के कार्यकर्ताओं ने अभियान टोली के साथ बदसलूकी की, प्रचार सभाओं में बाधा पैदा करके मज़दूरों को तितर-बितर करने की कोशिश की। एक दिन एक प्रचार टोली से पर्चे छीन कर जलाये। यहाँ तक कि शाहाबाद डेयरी स्थित जिस शहीद भगतसिंह पुस्‍तकालय में स्‍त्री और पुरुष मज़दूरों की मीटिंगें और विविध सांस्‍कृतिक कार्यक्रम हुआ करते हैं, रात में उसका बोर्ड कुछ लोग उतार ले गये। फिर वहाँ पत्‍थरबाजी भी की गयी। कल शाम को गाड़ी में सवार पीकर धुत्‍त ‘आप’ पार्टी के कुछ लोगों ने बादली में प्रचार टोली की स्‍त्री सदस्‍यों के साथ गाली-गलौज की और धमकियाँ दीं, फिर मज़दूरों के इकट्ठा होने पर वे वहाँ से चले गये!पहली बात, यही वह लोकतांत्रिक संस्‍कृति है, जिसकी केजरीवाल, सिसोदिया और योगेन्‍द्र यादव दुहाई देते नहीं थकते? मज़दूरों के नितान्‍त शान्तिपूर्ण आन्‍दोलन से इतनी बौखलाहट क्‍यों? आखिर मज़दूर माँग ही क्‍या रहे हैं? उनका मात्र इतना कहना है कि केजरीवाल ने मज़दूरों से जो वायदे किये थे, उन्‍हें पूरा करने के बारे में कुछ तो बोलें! वे तो सत्‍तासीन होने के बाद साँस-डकार ही नहीं ले रहे हैं।

घरों, झुग्गियों, बस्तियों, कारखानों से निकलो, चलो दिल्‍ली सचिवालय!

आज सुबह से ही उत्तर-पश्चिमी दिल्‍ली मज़दूर यूनियन और स्‍त्री मज़दूर संगठन के कार्यकर्ताओं ने मज़दूर मांगपत्रक आंदोलन के तहत अलग-अलग टोलियां बनाकर बाहरी दिल्‍ली के शाहाबाद डेयरी के डी, ई और एफ ब्‍लॉक की झुग्गी बस्तियों में तथा भोरगढ़ औद्योगिक क्षेत्र में गोलचक्‍क्‍र के पास प्रचार किया। कार्यकर्ताओं ने दिहाड़ी मज़दूरों, ठेका मज़दूरों, स्‍त्री मज़दूरों, झुग्‍गीवासियों का आह्वान करते हुए उन्‍हें कल यानी 6 फरवरी को सुबह 11 बजे भारी तादाद में दिल्‍ली सचिवालय पहुंचने के लिए कहा। विगत एक माह से निरंतर प्रचार के कारण उत्‍तर-पश्चिमी दिल्‍ली की अधिकांश मेहनतकश आबादी को इस आंदोलन के बारे में पता है और वे इसका व्‍यापक समर्थन कर रहे हैं।

6 फरवरी,11 बजे चलो दि‍ल्‍ली सचि‍वालय। मेहनतकश ने जान लि‍या है हक लेना ठान लि‍या है।

आज करावल नगर, खजूरी खास और वजीरपुर में दि‍ल्‍ली मजदूर यूनि‍यन ने रिक्शे पर माइक टांग कर मजदूर मांगपत्रक आन्‍दोलन के तहत जुटान अभियान चलाया।

बाहरी दिल्‍ली में शाम को भी प्रचार-वाहन से प्रचार व जनसंपर्क

आज शाम को मज़दूर मांगपत्रक आन्‍दोलन के तहत उत्‍तर-पश्चिमी दिल्‍ली मज़दूर यूनियन और स्‍त्री मज़दूर संगठन के कार्यकर्ताओं ने रोहिणी के सेक्‍टर 26 व 27 की बस्तियों में प्रचार-वाहन से प्रचार किया व पर्चे बांटे। इसके अलावा नरेला औद्योगिक क्षेत्र के शाहपुर गढ़ी इलाके में जनसंपर्क किया और ‘6 फरवरी को दिल्‍ली सचिवालय चलो’ का आह्वान करने वाला पर्चा वितरित किया गया। सेक्‍टर-27, रोहिणी की बस्‍ती में प्रचार-वाहन द्वारा प्रचार करते समय नशे में धुत कार सवार ‘आप’ कार्यकर्ताओं ने अभियान के कार्यकर्ताओं से गाली-गलौज की। उन्‍होंने स्‍त्री मज़दूर संगठन की महिला साथियों से भी बदसलूकी की, बाद में विवाद बढ़ने पर अभियान के समर्थन में आसपास की व्‍यापक मज़दूर आबादी को एकजुट होते देख वे ‘आप’ कार्यकर्ता वहां गाली-गलौज करते और धमकियां देते हुए निकल गए। इसके बाद प्रचार-वाहन और अभियान के कार्यकर्ता आगे बढ़ गए और पूरी बस्‍ती में सघन प्रचार व पर्चा वितरण किया।

उत्तर-पश्चिमी दिल्‍ली में सड़कों पर उतरे प्रचार-वाहन

उत्तर-पश्चिमी दिल्‍ली मज़दूर यूनियन तथा स्‍त्री मज़दूर संगठन द्वारा चलाए जा रहे मज़दूर मांगपत्रक आंदोलन के तहत आज इस इलाके की व्‍यापक मज़दूर आबादी से अपनी विभिन्‍न मांगों के समर्थन में आगामी 6 फरवरी को लाखों की संख्‍या में दिल्‍ली सचिवालय पहुंचने का आह्वान किया गया। इसमें मुख्‍यत: समयपुर बादली औद्योगिक क्षेत्र, बवाना औद्योगिक क्षेत्र, नरेला-भोरगढ़ औद्योगिक क्षेत्र आदि शामिल हैं। समयपुर बादली में संजय कालोनी, सूरजपार्क, गड्ढा बस्‍ती तथा राजा विहार में और नरेला औद्योगिक क्षेत्र में विभिन्‍न ब्‍लॉकों, शाहपुर गढ़ी आदि क्षेत्रों में प्रचार-वाहन को बैनर, पोस्‍टर, लाल झण्‍डों से सजाकर माइक लगाकर सघन और गहन प्रचार चलाया गया।

समयपुर बादली के लेबर चौक और संजय कॉलोनी में प्रचार

लेबर चौक पर काम की तलाश में निकले मज़दूर सुबह कुछ नौजवानों को सिर पर और बाजुओं पर लाल पट्टी बांधे नारे लगाते देखकर पहले तो कुछ चौंक-से गए, लेकिन जब साथियों ने अपनी बात रखी और पर्चा बांटना शुरू किया तो चारों और मज़दूर इकट्ठा हो गए और पुरजोर तरीके से मज़दूरों की एकजुटता पर जोर दिया। इसके बाद यूनियन और स्‍त्री मज़दूर संगठन के कार्यकर्ता संजय कॉलोनी पहुंचे, जहां के हालात अन्‍य किसी भी उपेक्षित बस्‍ती से बहुत अलग नहीं थे। यहां भी बीच-बीच में सभाएं की गयीं और घर-घर जाकर ‘6 फरवरी को दिल्‍ली सचिवालय चलो’ अभियान के बारे में बताया गया। आज भी प्रचार अभियान के दौरान ‘आप’ के दो कार्यकर्ताओं से झड़प हुई जिससे साथियों ने विनम्रतापूर्वक अपनी बात कहकर टाल दिया। प्रचार अभियान के बाद कई मज़दूरों को साथ लेकर साथियों ने पूरे इलाके में मांगपत्रक आंदोलन के तहत 6 फरवरी को दिल्‍ली सचिवालय चलने के बारे में पोस्‍टर लगाए।

“मेहनतकश जन जागो, अपना हक लड़कर मांगो!”

मांगपत्रक आन्‍दोलन के तहत उत्तर-पश्चिमी दिल्‍ली मज़दूर यूनियन और स्‍त्री मज़दूर संगठन ने बादली औद्योगिक क्षेत्र के राजा विहार, सूरजपार्क, संजय कॉलोनी तथा रोहिणी सेक्‍टर 26 और 27 एवं शाहाबाद डेयरी की मज़दूर बस्‍ती के साथ ही नरेला-बवाना औद्योगिक क्षेत्र के बवाना जे.जे. कॉलोनी, मेट्रो विहार, होलंबी कलां, शाहपुर गढ़ी, भोरगढ़, नरेला जे.जे. कॉलोनी में मज़दूर जुटान की गति को तेज कर दिया है। इसी के तहत, आज सुबह शाहाबाद डेयरी के मदर डेयरी चौक पर पर्चा वितरण किया गया। ‘6 फरवरी को दिल्‍ली सचिवालय चलो’ के पर्चे को ‘आप’ कार्यकर्ताओं ने जलाने की कोशिश की, जिसे अभियान के साथियों और व्‍यापक मज़दूर आबादी ने नाकाम करते हुए मज़दूर एकता ज़ि‍न्‍दाबाद के नारे भी लगाये।

मांगपत्रक आंदोलन: बाहरी दिल्‍ली में दीवार-लेखन और जनसभा व पर्चा वितरण जारी

कल रात उत्तर-पश्चिमी दिल्‍ली मज़दूर यूनियन तथा स्‍त्री मज़दूर संगठन मांगपत्रक आंदोलन की ओर से शाहाबाद डेयरी के बी-ब्‍लॉक बस स्‍टॉप के पास तथा सेक्‍टर-26 रोहिणी में दीवार लेखन किया गया तथा 6 फरवरी को मज़दूरों की मांगों के समर्थन में बड़ी संख्‍या में लोगों से ‘दिल्‍ली सचिवालय चलो’ का पर्चा वितरित किया गया। इसके बाद, आज सुबह शाहाबाद डेयरी के ई-ब्‍लॉक की झुग्‍गी बस्‍ती में प्रचार कार्य, जनसभाएं, पर्चा वितरण करके मांगपत्रक आंदोलन के बारे में बताया गया और एकजुट होकर दिल्‍ली सचिवालय पहुंचने का आह्वान किया गया।

बाहरी दिल्‍ली में विरोधी तत्‍वों द्वारा बाधित करने के बावजूद तेज हुआ मांगपत्रक अभियान

उत्तर-पश्चिमी दिल्‍ली मज़दूर यूनियन और स्‍त्री मज़दूर संगठन द्वारा चलाए जा रहे मांगपत्रक अभियान से बौखलाए मज़दूर विरोधी तत्‍व लगातार इस आंदोलन को बाधित करने की मुहिम में जुटे हुए हैं। इसी क्रम में, उन्‍होंने उत्‍तर-पश्चिमी दिल्‍ली में मांगपत्रक अभियान के शाहाबाद डेयरी स्थित संपर्क केंद्र ‘शहीद भगतसिंह पुस्‍तकालय’ के दीवार पर लगे बोर्ड को ही गायब कर दिया, जबकि वह बोर्ड ना तो बेचा जा सकता है और ना ही किसी अन्‍य उपयोग में आ सकता है, और इसी के आधार पर अभियान के कार्यकर्ताओं का अंदेशा है कि वह बोर्ड विरोधी तत्‍वों ने गायब किया है। इस पुस्‍तकालय में मजदूर परिवारों के बच्‍चों और स्त्रियों को पढ़ाने और उन्‍हें जागरूक बनाने का काम किया जाता है और अपने हकों-अधिकारों के लिए सचेत किया जाता है। वहां पर दर्जनों बच्‍चे और महिलाएं पढ़ने आते हैं। इस घटना को लेकर स्‍थानीय लोगों में आक्रोश व्‍याप्‍त है।

बाहरी दिल्‍ली में मांगपत्रक अभियान जोरों पर, बौखलाए ‘आप’ कार्यकर्ताओं ने दी धमकियां

आज शाहाबाद डेयरी के अभियान में भी लगभग सभी सभाओं, गलियों में ‘आप’ के कार्यकर्ताओं-समर्थकों ने यूनियन औरस्‍त्री मज़दूर संगठन की कार्यकर्ताओं से बदतमीजी तक की और एक जगह गाली गलौज भी किया, जिनमें एक-दो जगह तो ये कार्यकर्ता या समर्थक सुबह सुबह शराब पीकर आए हुए थे। अभियान से जुड़े कार्यकर्ता उनसे पहले की ही तरह लगातार अनुरोध करते रहे कि हम लोग जनवादी तरीके से जनता के बीच अपनी बात लेकर जा रहे हैं, जिसका मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल खूब दुहाई देते हैं, आप लोग भी अपनी बात लेकर लोगों के बीच जाइए, हमें तंग करने के तरीके से आप अपनी ही पार्टी के’उसूलों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। वे अभियान के साथियों से कहने लगे कि आप लोग केजरीवाल को समय नहीं दे रहे हैं। इस पर, साथियों ने उन्‍हें विनम्रतापूर्वक बताया कि केजरीवाल मज़दूरों से किए गए वायदों को पूरा नहीं कर रहे हैं, जबकि डेढ़ महीने बीत चुके हैं और केजरीवाल सरकार मज़दूरों से किए गए वायदों को पूरा करने की कोई निश्चित समयावधि भी नहीं बता रही हैं। इसीलिए, मज़दूरों का यह कर्तव्‍य बनता है कि वे 6 फरवरी को दिल्‍ली सचिवालय पहुंच कर सरकार को इन वायदों पर अमल करने की याद दिलाएं।

शाहाबाद डेयरी के एफ ब्‍लॉक की झुग्‍गीबस्‍ती में घर-घर जाकर जनसंपर्क

इस बस्‍ती की हालत भी अन्‍य झुग्‍गीबस्तियों की तरह ही है, चारों ओर गंदगी फैली रहतीहै, झुग्गियां कच्‍ची हैं, यहां भी रिक्‍शेवाले, ठेलेवाले, दिहाड़ी मज़दूर, कारखाने के मज़दूर, घरों में साफ-सफाई का काम करने वाली स्त्रियां रहती हैं। सुबह कार्यकर्ताओं ने इस झुग्‍गीबस्‍ती के बीचों-बीच जाकर ज़ोरदार नारेबाजी और भाषण देने से आज के अभियान की शुरुआत की। साथियों ने कहा कि हमें केजरीवाल को उनके चुनावपूर्व वायदों को याद दिलाने के लिए और उन्‍हें जल्‍द से जल्‍द पूरा करने का दबाव बनाने के लिए एकजुट होकर लड़ना होगा। सरकार सिर्फ वायदे कर रही है और समितियां बना रही है, जिससे अन्‍य सरकारों की तरह ही समितियां बनाकर इन मांगों को टाला जा सके। हमें चौकस रहना होगा। इसके बाद उपस्थित लोगों को पर्चें बांटने के साथ ही 6 फरवरी को दिल्‍ली सचिवालय जाने के इच्‍छुक मज़दूरों के नाम-पते दर्ज किए गए। फिर स्‍त्री मज़दूर संगठन और उत्तर-पश्चिमी दिल्‍ली मज़दूर यूनियन के कार्यकर्ताओं ने एक-एक घर जाकर लोगों को इस पूरे आंदोलन के बारे में बताया और अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर लड़ने का आह्वान किया। बस्‍ती की व्‍यापक मेहनतकश आबादी ने 6 फरवरी को दिल्‍ली सचिवालय पहुंचने का वायदा किया।

केजरीवाल ने मज़दूरों से मिलने से किया इंकार

वज़ीरपुर कारखाना मज़दूर यूनियन के नेतृत्व में वज़ीरपुर के मज़दूरों का स्वागत केजरीवाल ने दिल्ली पुलिस के बैरिकैडों से किया। केजरीवाल ने मज़दूरों से मिलने से इंकार कर दिया। परन्तु जब मज़दूर अपनी मांगो पर अडिग रहे और बैरिकेड कि तरफ बढने लगे तब केजरीवाल के दफ्तर ने फरमान दिया कि यूनियन के सिर्फ चार प्रतिनिधि ही केजरीवाल से मिल सकते हैं परन्तु यूनियन के प्रतनिधियों से भी मुख्यमंत्री नहीं मिले और न ही उनका कोई प्रवक्ता, बस सरकारी दफ्तरों सरीखे मज़दूरों के मांगपत्रक पर एक ठप्पा लगा दिया गया। वज़ीरपुर के मज़दूर केजरीवाल से मिलकर अपनी फैक्टरियों और झुग्गियों की हालत के बारे में बताकर उन्हें अपना मांगपत्रक सौंपना चाहते थे परन्तु केजरीवाल मज़दूरों से इतना डर गए कि उन्होंने पुलिस को आगे कर दिया। यूनियन ने एलान किया कि आने वाली ६ फरवरी को जब दिल्ली भर के मज़दूर सचिवालय पहुंचेंगे तब वज़ीरपुर के मज़दूर फिर से अपनी मांगों को लेकर सचिवालय पहुंचंगे और तब दिल्ली पुलिस और उनके बेरिकेड मज़दूरों के सैलाब को नहीं रोक पाएंगे।

बादली औद्योगिक क्षेत्र और डीटीसी के आंदोलनरत ठेकाकर्मियों के बीच चला मांगपत्रक अभियान

जब मांगपत्रक आन्‍दोलन से जुड़े कार्यकर्ता इन ठेका कर्मचारियेां की समस्‍या सुन रहे थे, और उनकी सलाह पर डिपो में 6 फरवरी के अभियान का पोस्‍टर लगा रहे थे, तभी सेक्‍टर-18 के डिपो नं 4 पर कार्यरत ‘आप’ समर्थक डीटीसी अधिकारियों ने उनसे झड़प शुरू कर दी, सुरक्षाकर्मियों को आदेश देकर पोस्‍टर फड़वा दिए और कहा कि आप लोग भाजपा और कांग्रेस के इशारे पर केजरीवाल व ‘आप’ के खिलाफ कर्मचारियों को भड़का रहे हैं। गौरतलब है कि इसी तरह की बातें कल के शाहाबाद डेयरी अभियान के दौरान भिड़े ‘आप’ समर्थकों ने कही थीं।
एक खबर के अनुसार, डीटीसी में लगभग 14,000 ड्राइवर, कंडक्‍टर ठेके पर हैं, इसके अलावा बड़ी संख्‍या में मैकेनिकल स्‍टाफ पर ठेके पर काम कर रहा है। लेकिन लंबे समय से नौकरी स्‍थायी करने, अच्‍छी वर्दी देने, तमाम भत्‍ते देने आदि मांगों को लेकर अधिकारियों, मंत्रियों से लेकर अनेक दरवाजों पर दस्‍तक दे चुके हैं, लेकिन स्थिति ज्‍यों कि त्‍यों बनी हुई है। इस बार, कल से ही मिलेनियम डिपो, इंद्रपस्‍थ पर तकरीबन 400 ठेका कर्मचारी धरने पर बैठे हुए हैं और उस धरने में शामिल होने वालों की संख्‍या बढ़ती ही जा रही है। इसी की वजह से कई डीटीसी की कई बसें भी सड़क पर नहीं उतरीं।

शाहाबाद डेयरी में मांगपत्रक अभियान द्वारा जुझारू प्रचार

इसी मज़दूर बस्‍ती में आम आदमी पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं ने मांगपत्रक अभियान को बाधित करने की नाकाम कोशिश भी की। वे अभियान के साथियों से कहने लगे कि आप लोग केजरीवाल को समय नहीं दे रहे हैं। इस पर, साथियों ने उन्‍हें विनम्रतापूर्वक बताया कि केजरीवाल मज़दूरों से किए गए वायदों को पूरा नहीं कर रहे हैं, जबकि डेढ़ महीने बीत चुके हैं और केजरीवाल सरकार मज़दूरों से किए गए वायदों को पूरा करने की कोई निश्चित समयावधि भी नहीं बता रही हैं। इसीलिए, मज़दूरों का यह कर्तव्‍य बनता है कि वे 6 फरवरी को दिल्‍ली सचिवालय पहुंच कर सरकार को इन वायदों पर अमल करने की याद दिलाएं। अभियान के साथियों ने यह भी कहा कि आप पार्टी का तो मुख्‍य नारा ही भ्रष्‍टाचार से मुक्ति का है, लेकिन सबसे ज्‍यादा भ्रष्‍टाचार तो श्रम-विभाग में व्‍याप्‍त है, जिससे दिल्‍ली की लगभग 60 लाख मज़दूर आबादी प्रभावित है। इसको खत्‍म करने के लिए भी सरकार ने कोई ठोस आश्‍वासन नहीं दिया है। लिहाजा इन वायदों की याददिहानी के लिए लाखों मज़दूर 6 फरवरी को दिल्‍ली सचिवालय पर पहुंचेंगे, जैसाकि अरविन्‍द केजरीवाल ने भी यह कहा था कि आप हमें इन वायदों की याद दिलाते रहिए।

नरेला में जनसभा, पर्चा-वितरण, पो‍स्‍टर लगाने और मज़दूरों की बैठक के जरिए मांगपत्रक आन्‍दोलन की तैयारी

उत्तर-पश्चिमी दिल्‍ली मज़दूर यूनियन और स्‍त्री मज़दूर संगठन ने आज नरेला के लेबर चौक पर दिहाड़ी पर खटने वाले मज़दूरों के बीच नारे लगाकर सभा की और मांगपत्रक आन्‍दोलन के तहत 6 फरवरी को दिल्‍ली सचिवालय चलने के अभियान के बारे में बताते हुए, उन्‍हें एकजुट होकर लड़ने का आह्वान किया। इस दौरान पर्चा वितरण होता रहा और उसके बाद मज़दूरों के नाम-पते नोट किए गए। ये मज़दूर बेलदारी, राजमिस्‍त्री, पुताई, खेत मज़दूरी आदि का काम करते हैं और किसी भी प्रकार के श्रम कानूनों से इनका वास्‍ता नहीं रहता।
इसके बाद मांगपत्रक आन्‍दोलन का जत्‍था नरेला औद्योगिक क्षेत्र के पीर बाबा पार्क पहुंचा, जहां 11 बजे उत्तर-पश्चिमी दिल्‍ली मज़दूर यूनियन की बैठक शुरू हुई। इस बैठक में भोरगढ़, शाहपुर गढ़ी, होलंबी कलां, नरेला आदि क्षेत्रों के लगभग ढाई सौ मज़दूरों ने सक्रिय भागीदारी की। बैठक में 6 फरवरी को लाखों की तादाद में दिल्‍ली सचिवालय पहुंचने का प्रस्‍ताव ध्‍वनिमत से पारित हुआ और व्‍यापक मज़दूर जुटान के लिए बड़ी संख्‍या में कारखाना और बस्‍ती केन्द्रित बैठकें करने पर ज़ोर दिया गया। बैठक में सभी साथियों ने इस बात पर सहमति जतायी कि ठेका प्रथा का खात्‍मा, न्‍यूनतम मज़दूरी, सभी श्रम कानूनों को लागू कराने सहित मज़दूर वर्ग की मुक्ति के लिए एक लम्‍बे जुझारू तथा निर्णायक संघर्ष की ज़रूरत है ताकि मेहनतकश समाज की स्‍थापना की जा सके।

उत्तर-पश्चिमी दिल्‍ली के शाहाबाद डेयरी की बस्तियों में चला मांगपत्रक आन्‍दोलन अभियान

शाहाबाद डेयरी के एफ ब्‍लॉक स्थित पांच मंदिर के आसपास, व बी ब्‍लॉक में चले इस अभियान में व्‍यक्तिगत संपर्क व जनसभाओं के जरिए साथियों ने मज़दूरों को चुनाव पूर्व  अरविंद केजरीवाल द्वारा गरीबों-मजदूरों के लिए किए गए वायदों के बारे में बताया, जिनके बारे में उन्‍होंने चुनाव जीतने के बाद चुप्‍पी साध ली है।  यूनियन के साथियों ने इन वायदों की याददिहानी के लिए और उन्‍हें पूरा करने का दबाव बनाने के लिए 6 फरवरी को लाखों की तादाद में दिल्‍ली सचिवालय को घेरने का आह्वान किया। अपने जीवन और काम की बदतर स्थितियों को बदलने के लिए आक्रोशित बस्‍तीवासियों ने इस अभियान का पुरजोर समर्थन करते हुए कहा कि वे 6 फरवरी को दिल्‍ली सचिवालय जरूर पहुंचेंगे। इसके बाद सैकड़ों मजदूरों ने अपने नाम व पते दर्ज करवाए।

उत्तर-पश्चिमी दिल्‍ली में सघन और व्‍यापक हुआ मज़दूर मांगपत्रक आन्‍दोलन का अभियान

अगले माह की 6 तारीख को दिल्‍ली सचिवालय पहुंचकर मुख्‍यमंत्री केजरीवाल को मज़दूरों की मांगने सौंपने की तारीख करीब आने के साथ-साथ दिल्‍ली का मज़दूर मांगपत्रक आन्‍दोलन भी सघन और व्‍यापक होता जा रहा है। जगह-जगह पोस्‍टर लगाए जा रहे हैं, मज़दूरों से संपर्क किया जा रहा है, जनसभाएं, पर्चा-वितरण आदि पहले की तरह जारी हैं। आज इसी क्रम में उत्तर-पश्चिमी दिल्‍ली मज़दूर यूनियन व स्‍त्री मज़दूर संगठन के कार्यकर्ता बादली रेलवे स्‍टेशन, बादली आद्योगिक क्षेत्र, सेक्‍टर 27, रोहिणी की बस्‍ती पहुंचे।

बाहरी दिल्‍ली के मेट्रो विहार के मज़दूरों के बीच पहुंचा मज़दूर मांगपत्रक आन्‍दोलन

लगभग एक लाख की मज़दूर आबादी वाली मेट्रो विहार की बस्‍ती में अन्‍य सभी गरीब बस्तियों की तरह शिक्षा का निचला स्‍तर, पीने के साफ पानी की कमी, सार्वजनिक शौचालयों की बदतर स्थिति, पन्नियों के दलदल से भरी हुई बजबजाती नालियां, बदबू मारते यहां-वहां पड़े हएु कूड़े के ढेर का साम्राज्‍य कायम है। ऊपर से मकान-मालिकों और दलालों-ठेकेदारों की गुण्‍डागर्दी अलग। यहां रहने वाले लोग लगभग 10 साल पहले दिल्‍ली के विभिन्‍न इलाकों लक्ष्‍मीनगर, शकरपुर, आईटीओ, बापूधाम, बड़ा बाग, पश्चिम विहार, कैम्‍प आदि से उजड़कर आये हुए परिवार हैं, जो पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्‍यप्रदेश आदि जगहों से विस्‍थापित हुए थे या यूं कहें कि पूंजी की मार से अपने जगह-जमीन से उजड़कर शहर में आकर व्‍यापक मेहनतकश आबादी का हिस्‍सा बन गये।

भोरगढ़ औद्योगिक क्षेत्र पहुंचा दिल्‍ली के मांगपत्रक आन्‍दोलन का जत्‍था

काम के लिए यहां से गुजरती आबादी को देखकर बरबस ही चार्ली-चैपलिन की फिल्‍म ‘मॉडर्न टाइम्‍स’ की याद आ जाती है। ये मज़दूर आबादी इक्‍कसवीं सदी में भी दोहरी गुलामी झेलने को मजबूर है और एक तरफ कारखाना मालिकों की गालियों, डांट-फटकार, घूसे-थप्‍पड़ की मार, तो दूसरी तरफ भोरगढ़ गांव के मकान मालिकों के ऑक्‍टोपसी पंजे के बीच फंसे रहने को मजबूर है। यहां के मकान मालिक मनमाने रेट पर बिजली का भुगतान करते हैं तथा अपने घरों में खोली हुई दुकानों से ही राशन व अन्‍य सामान लेने के लिए मजबूर करते हैं। ऐसा ना करने पर मज़दूरों से मकान खाली करवा लेते हैं। कारखाना मालिक तो उन्‍हें मनमाने तरीके से गुलामों-जानवरों की खटाते ही हैं। दलाल तथा गद्दार ट्रेड यूनियनों की करतूतों से भी यहां की व्‍यापक मज़दूर आबादी निराश-हताश है। इन मज़दूरों के चेहरे पर इस छटपटाहट की शिनाख्‍़त की जा सकती है। बस एक सब्र का बांध है जिसने इनके गुस्‍से को फूटकर धधकते लावे की तरह बहकर बाहर निकलने से रोका हुआ है। आज सुबह जब यूनियन के कार्यकर्ता उनके बीच पहुंचे तो काम पर पहुंचने की जल्‍दी के बावजूद उन्‍होंने साथियों की बात सुनी, पर्चे लिए और अपने नाम व पते नोट कराए।

बाहरी दिल्‍ली की सर्वाधिक उपेक्षित बस्‍ती सेक्‍टर-27, रोहिणी में पहुंचे मांगपत्रक आन्‍दोलन के कार्यकर्ता

सेक्‍टर-27 की बस्‍ती बरसों से सर्वाधिक उपेक्षित बस्तियों में से एक बनी हुई है। ना तो यहां आने-जाने के लिए सड़क है, ना गंदे पानी की निकासी की व्‍यवस्‍था, ना बच्‍चों के खेलने के लिए पार्क, ना पुलिस चौकी, ना परिवहन के नियमित साधन। यहां रहने वाले मजदूर सुबह टैम्‍पों में भरकर मायापुरी, नारायणा आदि के कारखानों में काम करने जाते हैं, तो कुछ बादली, शाहाबाद डेयरी, बवाना, नरेला, होलंबी कला के उद्योगों में काम करने जाते हैं या आसपास के इलाकों में बेलदारी, पल्‍लेदारी आदि का काम करते हैं। उन्‍होंने इस बात की ताईद की कि किसी भी कारखाने में श्रम कानून लागू नहीं होते और उनके साथ जानवरों जैसा बर्ताव किया जाता है। महिलाओं को तो दोहरी मार झेलनी पड़ती है। उनके लिए कोई सुविधा नहीं होती। लेकिन जिंदा रहने के लिए और अपने बच्‍चे पालने के लिए उन्‍हें यह सब झेलना पड़ता है।

होलंबी कलां रेलवे स्‍टेशन पर दस्‍तक दी दिल्‍ली मांगपत्रक आन्‍दोलन ने

आज जब होलंबी कला का रेलवे स्‍टेशन कोहरे से ढका हुआ था और सैकड़ो मज़दूर वहां आ-जा रहे थे, उसी समय उत्‍तर-पश्चिमी दिल्‍ली मज़दूर यूनियन और स्‍त्री मज़दूर संगठन के कार्यकर्ताओं ने वहां पहुंच कर जोरदार नारे लगाने शुरू किए। देखते ही देखते स्‍त्री-पुरुष मजदूरों ने उन्‍हें चारों ओर से घेर लिया। फिर यूनियन के साथियों ने वहां भाषण देकर उन्‍हें दिल्‍ली मांगपत्रक अभियान के बारे में बताया और 6 फरवरी को दिल्‍ली सचिवालय पर दस्‍तक देने का आह्वान करने वाले पर्चे बांटे और उनके नाम-पते नोट किए व समस्‍याएं सुनीं।
यूनियन के साथियों ने कहा कि पहली बार दिल्ली में किसी सरकार या मुख्यमन्त्री ने मज़दूरों से कुछ ठोस वायदे किये हैं। लेकिन ये सभी वायदे अपने आप पूरे नहीं हो जायेंगे। हम मज़दूरों को हमसे किये गये वायदों की याददिहानी करानी होगी। बिना जन-दबाव के शायद ही दिल्ली सरकार ये वायदे पूरे करे। अगर अब भी हम इन वायदों को पूरा करवाने के लिए एकजुट होकर सरकार पर दबाव नहीं बनाते तो फिर हमारी बदहाली, ग़रीबी और तंगहाली के लिए सिर्फ़ हम जि़म्मेदार होंगे।

शाहाबाद डेयरी और रोहिणी सेक्टर-26 में चला मांगपत्रक अभियान

उत्तरी-पश्चिमी दिल्ली मज़दूर यूनियन और स्त्री मज़दूर संगठन ने ‘मांगपत्रक आन्दोलन’ के तहत रोहिणी के सेक्टर-26 और शाहाबाद डेयरी के बी ब्लॉक में अभियान चलाकर पर्चे बांटे, जनसभाएं की और घर-घर जाकर संपर्क किया। कार्यकर्ताओं ने सभी को मुख्यमंत्री केजरीवाल द्वारा चुनाव से पहले मजदूरों के लिए किए वायदे याद दिलाने के लिए 6 फरवरी को दिल्ली सचिवालय पर इकट्ठा होने का आह्वान किया।
उत्तर-पश्चिमी दिल्ली में 18 और 19 जनवरी को शाहाबाद डेयरी और रोहिणी सेक्टर-26 में चले अभियान के तहत जगह-जगह जनसभाएं करके पर्चा वितरण, जनसंपर्क किया गया। हर जगह गरीब-मजदूर आबादी ने बताया कि उन्हें श्रम कानून के तहत अन्य सुविधाएं तो मिलना दूर रहा, न्यूनतम मज़दूरी तक नहीं मिलती है। इन अभियानों में महिलाओं ने भी 6 फरवरी को दिल्ली सचिवालय पर चलने के लिए अपने नाम लिखवाए और खुद कहा कि जब तक हम मिलकर लड़ेंगे नहीं तब तक हमें अधिकार नहीं मिलने वाले और मालिक लोग हमें कीड़े-मकोड़े से ज्यादा नहीं समझते।

पीरागढ़ी में मज़दूर मांगपत्रक आंदोलन

वैसे तो पीरागढ़ी दिल्ली में जूतों के उत्पादन के लिए मशहूर है। एक्शन, कैम्पस से लेकर छोटी बड़ी सैकड़ों जूतों की व गारमेंट की कम्पनियां हैं जो दिल्ली के खाते पीते वर्ग की ज़रूरतों को पूरा करती हैं। परन्तु इन फैक्टरियों में काम करने वाले लाखों मज़दूरों के साथ बर्बर किस्म का शोषण होता है। ‘आप’ कि राखी बिड़ला खुद मंगोल पूरी क्षेत्र से विधायक हैं पर इन्हे मज़दूरो के उत्पीड़न से कोई फर्क नहीं पड़ता है। 2011 में ही पीरागढ़ी की H-9 फैक्ट्री में सुरक्षा में लापरवाही की वजह से 70 से अधिक मज़दूर जल कर मर गए थे पर प्रशासन मालिक को बचाने में लगा रहा था। यह फिर से दोहराया न जाये इसीलिए उद्योग नगर मज़दूर यूनियन और मंगोलपूरी मज़दूर यूनियन ने मज़दूरों के बीच मज़दूर मांगपत्रक आंदोलन चलाया जिससे कि आने वाली 6 फरवरी को केजरीवाल की सरकार इस बात की गारंटी करे कि पीरागढ़ी के मज़दूर भी अपने हक़ हासिल करें।